कुपोषित बच्चों का उदर खाली, पोषित हो रही आंगनबाड़ियां

परचून की दुकानों पर बिक रहा कुपोषित बच्चों का पुष्टाहार
सैनिक पड़ाव के डलावघर पर लगे सरकारी पाउच की पन्नियों के ढेर में
कुपोषित बच्चों का उदर खाली, पोषित हो रही आंगनबाड़ियां
राज्य महिला आयोग की सदस्य रामसखी को नहीं दिखाई दी विभागीय खामियां

एटा। यूं तो राज्य की योगी सरकार दिव्यांगों के अलावा ऐसे निर्धन और गरीब परिवार जो अपने बच्चों के पालन पोषण करने में समर्थ नहीं हैं, उनका पोषण करने की कई योजनाएं चला रही है। इनमें एक प्रमुख योजना पोषण मिशन योजना के नाम से काफी चर्चित है, मगर अफसोस यह है कि सरकार द्वारा इतना कुछ किए जाने के बावजूद कुपोषित बच्चों का पोषण तो नहीं हो पा रहा, अलबत्ता विभाग में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपना पोषण कर रही हैं। कुपोषित बच्चों के लिए आने वाली पुष्टाहार की वस्तुएं परचून की दुकानों पर खुलेआम बिक रही हैं।
दरअसल हाल ही में राज्य महिला आयोग की सदस्य रामसखी ने मुख्यालय स्थित विकास खंड शीतलपुर पर पोषण पंचायतों का शुभारंभ किया था। कई विभागीय और अन्य विभागों के उच्चाधिकारी भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। मगर खामियां किसी को नजर नहीं आईं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों का पुष्टाहार उन तक पहुंच भी पा रहा है इस पर कोई चर्चा नहीं की गई। जबकि सेम और मैम श्रेणी के बच्चों के अभिभावकों को कई तरह की जानकारियां कार्यक्रम के दौरान दी गई। उन्हें पोषण वाटिका पौधारोपण और सुपोषण के लिए योग व आयुष के महत्व से भी अवगत कराया गया। जिला विकास अधिकारी एसएन सिंह कुशवाहा ने उपस्थित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर कुपोषितों को पुष्टाहार वितरण के भी कई निर्देश दिए, किंतु विभाग में क्या कुछ चल रहा है कुपोषितों का पोषण करने हेतु जो पुष्टाहार सरकार मुहैया करा रही है, वह उन तक पहुंच भी पा रहा है अथवा नहीं इसे जानने के कहीं कोई प्रयास नहीं किए गए। असलियत तो यह है कि आंगनवाड़ी एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग में कार्यरत महिला आंगनबाड़ियों का रवैया ठीक नहीं है। उनके द्वारा गर्भवती महिलाओं और बच्चों का जो पुष्टाहार का उठान किया जाता है वह सीधे ब्लैक मार्केट में बेच दिया जाता है। दाल दलिया और घी की सरकारी पन्नियों से दुकानदार उपरोक्त वस्तुओं को निकालकर अपने कट्टे में भर देते हैं और खाली पनिया सैनिक पड़ाव स्थित डलावघर पर फेंक दी जाती है। विभाग के लोगों को इसकी जरा भी जानकारी नहीं है। तमाम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का यह सिलसिला जबसे योजना की शुरुआत हुई है तब से निरंतर जारी है। यही नहीं उनके द्वारा जो सूचियां तैयार कर डीपीओ और डीपीआरओ को दी गई हैं उनमें अधिकांश गर्भवती महिलाएं और कुपोषित बच्चों के नाम फर्जी दर्शा कर उनका पुष्टाहार हजम किया जा रहा है।
यदि उच्चाधिकारियों द्वारा आंगनवाड़ी महिलाओं की जांच कराई जाए तो कई मामलों के खुलासे सामने आ सकते हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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