विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं, पोषण वाटिका,

जिले में पोषण पंचायत आज

एटा,

जन्म से 6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं में कुपोषण को कम करने के उद्देश्य से आजकल पोषण माह मनाया जा रहा है। जिले में बुधवार को ब्लॉक एवं तहसील स्तर पर पोषण पंचायत का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन मिशन शक्ति के अंतर्गत पोषण माह को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। इस दौरान बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं, पोषण वाटिका, पौधारोपण एवं सुपोषण के लिए योग तथा आयुष के महत्व के विषय में जानकारी दी जाएगी।

जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि पोषण माह के अंतर्गत सितंबर माह में प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग कार्यक्रमों द्वारा लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करने के विषय में कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग द्वारा मिशन शक्ति के अंतर्गत पोषण माह को सशक्त करने हेतु महिलाओं, बच्चों के पुष्टाहार के लिए बुधवार को ब्लॉक व तहसील स्तर पर पोषण पंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान कुपोषित महिलाओं,बच्चों के लिए पुष्टाहार विभाग द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी व पोषण वाटिका के माध्यम से सहजन, नींबू, अमरूद, पपीता आंवला आदि के साथ-साथ हरी पत्तेदार सब्जियां आदि के विषय में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही योगा और आयुष के महत्व को समझाया जाएगा।

डीपीओ ने बताया कि पोषण माह का मुख्य उद्देश्य कुपोषण को दूर कर सुपोषण के विषय में सभी को बताना है। जिले में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा पोषण माह के तीसरे सप्ताह के दौरान स्थानीय खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता सुरक्षित रखने और उनसे तैयार किए जाने वाले पौष्टिक व्यंजन पर आधारित कार्यक्रम किए जाएंगे।व माह के चौथे सप्ताह में गंभीर,अति कुपोषित बच्चों की पहचान तथा उनके लिए विशेष आहार संबंधित कार्यक्रम व व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

बाल चिकित्सक डॉ अंशुल गुप्ता बताते हैं कि 6 माह के पश्चात केवल मां के दूध से शिशु का पोषण पूर्ण नहीं होता है। शिशु के पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए शिशु को अनुपूरक आहार प्रदान करना होता है।इसलिए बच्चे को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में तीन से चार बार आहार दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही जब बच्चे 1 वर्ष के हो जाते हैं तो बच्चों को ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और खनिज लवणों से युक्त आहार देना चाहिए। बच्चों में पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और वसा की आवश्यकता होती है।इसलिए उनके खाद्य पदार्थों में साबुत अनाज जैसे ब्राउन राइस, मेवा वनस्पति तेल आदि को शामिल करना चाहिए। इसके साथ ही फल एवं सब्जियों में केला,आलू, शकरकंद जैसे खाद्य पदार्थ को शामिल करना चाहिए। एवं शरीर में मांसपेशियों के निर्माण और विकास के लिए प्रोटीन युक्त आहार अहम भूमिका निभाते हैं इसलिए उनके भोजन में मास, अंडा, मछली, दूध आदि को शामिल करना चाहिए। साथ ही शरीर में विटामिन्स के लिए उनके आहार में सभी रंग के फलों और सब्जियों को शामिल किया जाना चाहिए।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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