कोरोना, हो या डेंगू, मलेरिया, इन सबकी खुराक तो इंसान ही है।

#यूपी,
कोरोना, हो या डेंगू, मलेरिया, इन सबकी खुराक तो इंसान ही है।
एटा-संचारी रोगो ने इंसानों पर पूरी पकड़ बना ली लेकिन शासन प्रशासन की भूमिकाएं बनती रही डेंगू, मलेरिया, सर्दी बुखार,और टायफायड,जैसे रोगों से आज जन हानि हो रही है बच्चे बड़े असमय मौत से—और लापरवाहियां चर्म पर चल रही है, चाहे कोई कार्य पालिका क्यों ना हो किसी का कार्य समय पर नहीं हो रहा है,जबतक जनहानि नहीं होने लगती है,कौनसी पालिका नही जानती हैकि डेंगू मलेरिया मच्छरों की जननी है,फिर तैयारियां क्यों नहीं समयनुसार होती है जबतक कि इंसानों की वलि नहीं चढने लगती है,शहर गांव कालोनियां गंदगी से अटे पड़े है, जगह जगह कीचड़ और जल भराव अंधी आँखों से देखे जा सकते है,क्यों समय रहते इनपर अंकुश नहीं लगाया जाता है न कोई छिड़काव होता है न साफ सफाई आजकल झाड़ू कुर्सियों के नीचे लग रही है और पब्लिक अपना अमूल्य बहुमत देकर भी ठगी की ठगी रह जाती है,माईबापोंं की सुरक्षा शिकारी भेड़ियों का पीछा करने जैसी—-सच कुलमिलाकर कहा जाए कि प्रशासन की बड़ी लापरवाही परिणाम है डेंगू मलेरिया, तब कहां जाए आदमी जो दो साल से कोरोना की मारसे अभी नहीं उभर पा रहा है, तबतक ये लापरवाहियों की देन संचारी रोगों मे मौत सामसे आ गई मौत भेस बदलकर हमारे साथ रहने लगी और इंसानों की जिंदगी निगलने लगी पर सुरक्षा का रवैया अपनी कार्य प्रणाली मे कोई परिवर्तन नहीं कर रहा ये हम नहीं हर आँख मे तस्वीर है लापरवाही की पर अंधता चलन आज इंसानों की वलि लेता चला रहा है फिर चाहे कोरोना, हो या डेंगू मलेरिया खाते तो सभी इंसानों की ही जिंदगी है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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