बाबूजी के आह्वान पर गुप्त रास्तों से ले गए थे बसें पूर्व एमएलसी सुधाकर वर्मा

बाबूजी के आह्वान पर गुप्त रास्तों से ले गए थे बसें
एटा। पूर्व एमएलसी सुधाकर वर्मा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के काफी करीबी रहे थे। एटा में अक्सर अरुणा नगर स्थित उनके आवास पर आकर रुकते थे। 15-20 दिन तक का प्रवास उनके आवास पर किया था। यहां पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात और राजनीतिक रणनीति बनती थी। सुधाकर वर्मा बताते हैं कि 1988 में बाबूजी ने पांच लाख किसानों की रैली लखनऊ में करने का एलान किया था। एटा से भी दो बसों में किसानों को लखनऊ पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
उस समय पार्टी बेहद कमजोर स्थिति में थी। पांच लाख किसानों की रैली की बात पर सभी हतप्रभ थे। उम्मीद नहीं थी कि इतने किसान जुटाए जा सकते हैं। परिस्थितियां भी अनुकूल नहीं थीं। जिसके चलते यहां से कोई बस ले जाने को तैयार नहीं था। जनसंघ के कार्यकर्ता शिवनारायण गुप्ता की बसें चला करती थीं। इस कार्य के लिए उन्होंने हामी भरी। गुप्त रास्तों से होकर बसों में किसानों को ले गए थे। बाबूजी ने जो कहा था, वह कर दिखाया। रैली में पांच लाख से ज्यादा ही किसान शामिल हुए थे। यहीं से भाजपा की दशा बदलना शुरू हो गई और पार्टी आगे बढ़ती गई।
सुधाकर वर्मा बताते हैं कि उनके पिता जनसंघ में थे। जिसके चलते बाबूजी से कुछ परिचय था। उस समय एलएलबी में प्रवेश की बहुत मारामारी थी। बाबूजी स्वास्थ्य मंत्री थी, तो प्रवेश की सिफारिश के लिए उनके गांव बरौली चले गए। बाबूजी ने जनसंघ का परिचय पाकर काफी सम्मान दिया। भोजन भी कराया। प्रवेश मिल गया और बाबूजी से मुलाकातें होनी लगीं। उस समय एटा की अलीगंज, जलेसर, निधौली कलां सीटों पर पार्टी से कोई चुनाव लड़ने का इच्छुक नहीं होता था। 1985 में उन्होंने टिकट देकर निधौली कलां सीट पर लड़ाया था। भले ही चुनाव हार गए, लेकिन इसके बाद से बाबूजी से नजदीकियां बढ़ गई थीं।
जुबां पर रहते थे कार्यकर्ताओं के नाम: संदीप जैन
भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप जैन बताते हैं कि 2019 में राज्यपाल बनने के बाद बाबूजी एटा आए थे। प्रोटोकॉल के चलते उन्हें पीडब्ल्यूडी का गेस्ट हाउस आवंटित किया गया था, लेकिन शांति नगर स्थित आवास में वह काफी समय बिताते थे। यहां पार्टी के पदाधिकारी ही नहीं कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करते थे। कार्यकर्ताओं के नाम उनकी जुबान पर रहते थे। तुरंत पहचान लेते और नाम लेकर बात करते थे। जिससे लोगों के मन पर उनकी अमिट छाप पड़ती थी।
एटा के नाम से राजभवन में मिलती थी सीधी एंट्री
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज गुप्ता बताते हैं कि एटा से बाबूजी का नाता काफी गहरा रहा। खासतौर से यहां से सांसद बनने के बाद तो उनका बहुत ज्यादा जुड़ाव हो गया था। 2014 में राजस्थान का राज्यपाल बनने के बाद भी वह एटा आने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। एटा का कोई व्यक्ति जयपुर स्थित राजभवन में पहुंचता था तो उसे सीधी एंट्री मिलती थी और वह लोगों से मिलकर उनकी समस्या, शिकायत की जानकारी लेते थे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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