बीबीएयू केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ईडब्ल्यूएस को 10% कोटा तो ओबीसी को 27% क्यों नहीं

*बीबीएयू केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ईडब्ल्यूएस को 10% कोटा तो ओबीसी को 27% क्यों नहीं?*

*ऑल इंडिया कोटे की पीजी मेडिकल, बीबीएयू में ओबीसी को कोटा न देने व प्रतिनियुक्ति द्वारा बीडीओ,ईओ चयन की पिछड़ावर्ग आयोग से शिकायत*

लखनऊ,24 मई।समाजवादी पार्टी पिछडावर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटनराम निषाद ने बीबीएयू केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ व नीट द्वारा आल इंडिया मेडिकल कोटे की सीटों में ओबीसी को कोटा न देने व खण्ड विकास अधिकारी(बीडीओ) व अधिशासी अधिकारी(ईओ) की लोक सेवा आयोग की खुली प्रतियोगी परीक्षा द्वारा न कर प्रतिनियुक्ति के माध्यम से चयन करने की शिकायत राष्ट्रीय पिछड़ावर्ग आयोग के अध्यक्ष, मानव संसाधन विकास मंत्री व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से किया है। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्विद्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में स्थित एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसके वर्तमान कुलपति प्रो.संजय सिंह हैं। इस विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले इच्छुक विद्यार्थियों के लिए प्रवेश परीक्षा का आवेदन 27.05.2020 से 10.07.2020 तक मांगा गया है।
उन्होंने बताया कि इस विश्वविद्यालय में एससी/एसटी के लिए 50% आरक्षण निर्धारित रहा है।इस वर्ष से ईडब्ल्यूएस को भी 10% आरक्षण दिया जा रहा है,परन्तु ओबीसी को कोटा नहीं दिया गया है,जो सामाजिक अन्याय है।
निषाद ने बताया कि 1996 में स्थापित इस विश्विविद्यालय की 50% सीटें एससी, एसटी के लिए आरक्षित होती थीं और 50% सीटें अनारक्षित वर्ग के लिए।इस बार जो नामांकन नोटिफिकेशन जारी हुआ है उसमें 50% अनारक्षित सीटों में से 10% सीटें ईडब्ल्यूएस को दे दी गईं, किसी-किसी विषय मे तो एससी, एसटी के 50% में भी सेंधमारी की गई है। और ओबीसी का तो सीट बंटवारा में जिक्र भी नहीं है। एससी और एसटी की सीटों को अलग अलग कर दिया गया है।इसमें भी एक साजिश यह है कि एसटी के अभ्यर्थी न मिलने पर उसे अनारक्षित में जोड़ दिया जाएगा।उनका कहना है कि जब 50% सीट में ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है, तो फिर ईडब्ल्यूएस को क्यों?जब 50% आरक्षण की सीमा टूट चुकी है तो फिर ओबीसी को आरक्षण क्यों नहीं?
निषाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 465 खण्ड विकास अधिकारी के पद रिक्त हैं।प्रदेश सरकार इनमें से 336 पदों को प्रतिनियुक्ति से भरने में जुटी हुई है।उत्तर लोक सेवा आयोग की भर्ती के आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।ऐसे में बीडीओ व ईओ की प्रतिनियुक्ति से भरा जाना उचित नहीं है।प्रतिनियुक्ति में आरक्षण नीति का पालन नहीं किया जाएगा।उन्होंने आरक्षण कोटे के निर्धारण कर लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया सम्पन्न कराने की मांग किया है।
निषाद ने पीजी मेडिकल एंड डेण्टल में ओबीसी को कोटा न दिए जाने को सामाजिक न्याय के प्रतिकूल बताया है।नेशनल बोर्ड ऑफ एक्जामिनेशन-2020 के माध्यम से 7981 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है,जिसमे ओबीसी का कोटा खत्म कर दिया गया है।अनारक्षित की 3990 के सापेक्ष 6220 स्थान दिया गया है।इसकी को 1197 के सापेक्ष 1305,एसटी को 5898 के सापेक्ष 668 स्थान दिया गया है,वही ओबीसी को 2154-55 कको शून्य कर दिया गया है,जो अनुच्छेद-16(4) का उल्लंघन है।

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