
यूपीएटा,श्यमशान की सड़क पर अंतिम सफर करते बक्त अगर एक मुर्दा गिर गया तो एटा जिला का इतिहास बनने से कोई नहीं रोक सकता है—-
एटा,श्यमशान तक जाने बाली सड़क और इंसानों के कंधों पर रखे मुर्दों को देखकर बडी़ आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता हैकि ये सफर मोक्षधाम तक पहुंचने तक कितनी परेसानियों से गुजरता होगा,सायद कुछ चीजें इतनी महत्वपूर्ण और इमरजेंसी जैसी होती हैकि तुरंत समाधान जरूरी होते है तब इनके इंतजार मे न टेंडर न कोई भूमिका आडे़ आनी चाहिये लेकिन ये लापरवाही हर पालिका की कार्यप्रणाली को दर्शा रही है लजा रही है,कटु सत्य जिस रास्ते पर इतनी लीपापोती चल रही है उस रास्ते से हर किसी को गुजरना है, फिर चाहे वह कोई भी कार्य पालिका क्यों ना हो।इस सड़क पर मुर्दे लेजाते बक्त अगर एक हादसा हो गया तो जबाब किसी पालिका पर नहीं होगा लापरवाही का जिला मे इतिहास जरूर बन जाएगा,इस सड़क पर कबसे मंथन चल रहा है सब जानते हुये कि मौसम इंसानों का इंतजार नहीं करता है,वह तो अपने समय पर आना तय है,आज बर्षात मे यूंतो पूरे शहर की दुर्दशा हो रही है पर यहां नहीं होनी चाहिये थी जो त्राहि त्राहि होते महीनों गुजर गये लेकिन कार्यप्रणाली अपने उसी ढर्रे पर ढांक के तीन पात मे ग्रोथ कर रही है सो यहां तो सर्मनाक साबित हो रही है।