मानसून सिर पर, तब याद आई तालाबों की खोदाई

मानसून सिर पर, तब याद आई तालाबों की खोदाई
एटा। इस साल कोरोना संक्रमण की वजह से तालाब खोदाई का काम ठप पड़ा रहा। स्थिति सामान्य होने के बाद अब मनेरगा सेल द्वारा तालाब की खोदाई का कार्य शुरू किया गया है। पिछले साल जिले में जून तक बड़े स्तर पर काम शुरू किया गया था, लेकिन इस बार मानसून सिर पर आ गया तब तालाब खोदाई की याद आई है। कोरोना संक्रमण के चलते जिम्मेदार देरी की बात कह रहे हैं। बारिश होती है तो तालाब खोदाई का कार्य पूरा होना मुश्किल होगा।
मनरेगा की ओर से वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल 131 तालाबों की खोदाई की गई। यह काम पिछले साल जून तक पूरा कर लिया गया था। लॉकडाउन की वजह से मनरेगा श्रमिकों को अधिक रोजगार दिया गया और तालाब खोदाई से लेकर चक मार्ग पर मिट्टी डालने के काम अधिक हुए, लेकिन इस बार लापरवाही हावी रही और जून में खोदाई कार्य शुरू कराया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 117 तालाबों की खोदाई का लक्ष्य दिया गया है। करीब 40 तालाब की खोदाई जून में शुरू की गई है। इनमें कुछ तालाब पहले से बने हुए हैं, जिनकी सिल्ट सफाई, पानी का ढलान आदि को ठीक किया जा रहा है।
एक तालाब पर खर्च होते हैं करीब 1.50 लाख रुपये
एक तालाब को तैयार करने में एक से 1.50 लाख रुपये खर्च होते हैं। इसके बावजूद तालाब सूखे पड़े हैं। तमाम तालाबों की अभी तक सिल्ट सफाई भी नहीं की गई है। चारागाहों में तालाब बनाने के नाम पर सिर्फ खेत को समतल किया गया है। बारिश होती है तो इन तालाबों से कोई लाभ नहीं मिल सकेगा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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