
दुर्भाग्य और भ्रष्टतंत्र की मार झेल रहा है जिला एटा
जनता जनार्दन को अपना तीसरा नेत्र खोल देना चाहिए
एटा। आज़ादी के सात दशक बाद भी जिला एटा विकास नाम के पंक्षी की राह देख रहा है। कोई तो चमत्कार कभी हो जाए, जो जिला एटा के वाशिंदे गर्व से कह सकें कि यह हमारा एटा है।
एटा को दुर्भाग्य और भ्रष्टतंत्र नाम के दो राहु केतु के मध्य बनने वाले कालसर्पदोष का सामना करना पड़ रहा है। इस दोष का समाधान एक बार रोहन लाल चतुर्वेदी जी ने किया था। परन्तु, उनके समाधान पर भी यह दोष भारी रहा।
इस दोष का सम्पूर्ण समाधान करने का बीड़ा उठाया पूर्व जिलाधिकारी विजय किरण आनंद और जिलाधिकारी डॉक्टर विभा चहल ने। लेकिन, ये हमारे जिला एटा का दुर्भाग्य रहा है, जब भी कोई जिलाधिकारी लोककल्याणकारी कार्य करते हुए भ्रष्टतंत्र पर कुठाराघात करता है, तो तमाम माफ़िया गठजोड़ कर सफ़ेदपोश वालों के सहयोग से ट्रांसफर करा दिया जाता है।
ये तो निश्चित है, इस दोष का समाधान तब तक नहीं हो पायेगा, जब तक भू माफिया, शराब माफिया और भ्रष्ट सफ़ेदपोश की तिकड़ी केंद्र में बली होकर बैठी रहेगी।
यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को विकसित सुनहरा भविष्य देना चाहते हैं तो, जनता जनार्दन को अपना तीसरा नेत्र खोल देना चाहिए। एकजुट होक विभिन्न माफ़िया और भ्रष्ट सफेदपोशों का बहिष्कार करना चाहिए।
जिला एटा विजय किरण आनंद और डॉक्टर विभा चहल जैसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों को खो चुका है। अब और नहीं……. अब समय आ गया है इस दोष का सम्पूर्ण विनाश करने के लिए माफ़ियाओं और भ्रष्ट सफेदपोशों के विरुद्ध “हल्ला बोल” कर बहिष्कार करने का।