
अब बंगाल में भी शराबप्रेमियों की चांदी, दुकानों को खोलने की दी गई मंजूरी
कवि हरिवंश राय बच्चन जी की एक मशहूर साहित्यिक कृति है- मधुशाला, जिसको भारत में काफी पसंद किया जाता रहा है. मंदिर-मस्जिद बैर कराते, मेल कराती मधुशाला…वाली ये लाइन आसानी से लाखों लोगों की जुबान पर चढ़ चुकी है. इसके पीछे की एक वजह ये भी है कि भारत में लोगों के बीच पीने और पिलाने का शौक बीते कुछ दशकों में काफी बढ़ गया है. सरकारें भी इसका पूरा लाभ उठाने से नही चूकती. शराबप्रेमियों के इस शौक का राज्य सरकारों को भी सीधा फायदा होता है. जीएसटी और पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स के बाद राज्य सरकारों को सबसे ज्यादा कमाई शराब से ही होती है.
यही एक बड़ा कारण है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब लोग ऑक्सीजन सिलेंडर और अस्पतालों में बेड के लिए भाग-दौड़ कर रहे थे. कइयों बेगुनाहों की मृत्यु हो रही है उसके बावजूद कई राज्यों ने खाली खजाने को भरने हेतु शराब की दुकानों को नाम मात्र के पालन हो रहे नियम के साथ खोलने की इजाजत दे दी है. महाराष्ट्र, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए शराबप्रेमियों के लिए होम डिलीवरी की भी सुविधा शुरू कर दी गई थी.
वहीं पश्चिम बंगाल भी अब इस मामले कदम मिलाता हुआ नजर आ रहा है. यहाँचल रहे आंशिक लॉकडाउन में 1 जून से हल्की छूट दी गई है. रिटेल दुकानों को दोपहर 12 से 3 बजे तक खुले रहने की अनुमति दी है. लेकिन कोरोना की नई गाइडलाइन आईं हैं. इसी के तहत शराब दुकानों को भी खोलने की मंजूरी दे दी गई है लेकिन अभी ऐसा देखा जा रहा है कि दुकानों पर इक्का-दुक्का ही ग्राहकी हो रही है.