18 दिनों से भर्ती बुजुर्ग के कपड़ों को बदला, साथ में खाया खाना

सीएम योगी के मंत्र “नर सेवा नारायण सेवा” को यूपी के डॉक्टरों ने किया चरितार्थ

18 दिनों से भर्ती बुजुर्ग के कपड़ों को बदला, साथ में खाया खाना

लोकबंधु के डॉक्टर्स ने पेश की संवेदनशीलता की अनोखी मिसाल

मेरठ और जौनपुर के अस्पतालों में भी डॉक्टरों ने किया मरीजों का हौसला आफजाई, लखनऊ। बीते एक महीने पहले ही सीएम योगी ने कहा था कि आपदा की स्थिति में हमें अतिरिक्त संवेदनशील होने की जरूरत है। अगर कोई मरीज/परिजन क्षणिक आवेश में नाराजगी जाहिर करता है तो भी उससे संवेदना पूर्ण व्यवहार ही किया जाए। जिसके बाद से पूरे प्रदेशभर के अस्पतालों से डॉक्टरों की संवेदनशील तस्वीरें आना शुरु हो गई हैं। सीएम योगी के मंत्र नर सेवा नारायण सेवा को लखनऊ के लोकबंधु अस्पताल के डॉक्टरों ने चरितार्थ कर दिखाया है।

लखनऊ के लोकबंधु् अस्पताल में लगभग 18 दिनों से भर्ती एक बुजुर्ग के कपड़े बदलने के साथ साथ ड्यूटी डॉक्टर नीरज शुक्ला ने उन्हें अपने साथ खाना भी खिलाया। बुधवार को जब बुजुर्ग का कुर्ता गंदा हो गया तो डॉक्टरों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके कपड़े बदले। बता दें कि बुजुर्ग का कोई अपना नहीं है। ऐसे में लोकबंधु अस्पताल के डॉक्टरों ने अपना बनकर उनकी देखभाल की। जिसके बाद बुजुर्ग ने उन्हें धन्यवाद कहा।

इस बारे में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर ए एस त्रिपाठी से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया की एक बुजुर्ग करीब 18 दिन से लोक बंधु अस्पताल में भर्ती हैं, मरीज के आगे पीछे कोई नहीं है आज जब मरीज का कुर्ता गंदा हो गया था तो अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर नीरज शुक्ला ने मरीज के कपड़े देखें और फिर खुद ही उसे बदलवाने का फैसला किया। डॉक्टरों की टीम ने मिलकर बुजुर्ग मरीज का कुर्ता पायजामा बदलवाया।

ऐसी ही तस्वीर मेरठ के न्यूट्रिमा अस्पताल के कोविड वार्ड की भी देखने को मिली है जहां अस्पताल का स्टाफ और नर्स मरीजों का हौसला अफजाई करते दिख रहे हैं। कुछ इसी तरह की तस्वीर जौनपुर की भी देखने को मिली है जहां डॉक्टरों की संवेदनशीलता दिखाई दे रही है।
जाहिर है कि सरकारी अस्पतालों की छवि मरीजों के प्रति लापरवाही करने, ध्यान न देने जैसी बनी होती है। यही नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद बार बार इस बात को दोहराते आए कि प्रदेश के डॉक्टरों को अपने मरीजों के प्रति संवेदनशील रहना है। जिसका काफी असर देखने को मिल रहा है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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