रामपुर की महिला ने सांसद आजम खां की रिहाई के लिए खून से लिखा राष्ट्रपति काे पत्र, बिगड़ी आजम की हालत

रामपुर की महिला ने सांसद आजम खां की रिहाई के लिए खून से लिखा राष्ट्रपति काे पत्र, बिगड़ी आजम की हालत

रामपुर। लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती सपा सांसद आजम खां की रिहाई के लिए रामपुर में रहने वाली एक महिला ने अपने खून से राष्ट्र्रपति काे पत्र लिखा है। जिसमें उन्हाेंने राष्ट्र्रपति से आजम खां रिहाई का आदेश पारित कराने की मांग की है।
लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती सपा सांसद आजम खां की रिहाई के लिए रामपुर में रहने वाली एक महिला ने अपने खून से राष्ट्र्रपति काे पत्र लिखा है। जिसमें उन्हाेंने राष्ट्र्रपति से आजम खां रिहाई का आदेश पारित कराने की मांग की है। राष्ट्र्रपति काे यह पत्र रामपुर में रहने वाले अधिवक्ता विक्की राज की पत्नी नेहा राज ने लिखा है। उन्होंने कहा कि रामपुर के सांसद मुहम्मद आजम खां 26 फरवरी 2020 से जेल में बंद है। जिसके बाद काेरोना संक्रमित होने पर उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं। मेदांता हॉस्पिटल फिर बिगड़ी हालत

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खां की हालत एक बार फिर बिगड़ गई है।वह नौ मई से हॉस्पिटल में भर्ती है। उन्हें हालत बिगड़ने पर मेदांता में भर्ती किया गया हैं। डाक्टरों ने उन्हें जहां फिर से आइसीयू में शिफ्ट किया है वहीं चेस्ट इंफेक्शन और फाइब्रोसिस होने के कारण उन्हें ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।हालांकि चिकित्सक उनका लगातार मेडिकल बुलेटिन जारी कर रहे है। 72 वर्ष के संपा सांसद आजम खां की देखरेख क्रिटिकल एक्सपर्ट की टीम कर रही है जो उनकी स्वास्थ्य गतिविधियों पर बराबर नजर रखे हुए है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। जबकि उनके बेटे की हालत स्थिर बताई जा रही है।14 माह से सीतापुर जेल में है बंद

रामपुर से सपा सांसद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला को नौ मई को कोविड-19 संक्रमण के कारण भर्ती कराया गया था। आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला पिछले 14 महीने से सीतापुर जेल में बंद हैं। सीतापुर जिला कारागार प्रशासन के अनुसार 29 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एंटीजन जांच की थी, जिसमें दोन पॉजिटिव मिले। फिर दोनों का सैंपल आरटी-पीसीआर जांच को भेजा गया। एक मई को रिपोर्ट में दोनों ही कोरोना संक्रमित मिले है। ऑक्सीजन लेवल कम होने पर आजम खां को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया था।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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