ग्रा प ए के संस्थापक बाबू बालेश्वर लाल जी को याद किया गया

ग्रा प ए के संस्थापक बाबू बालेश्वर लाल जी को याद किया गया

आगरा । ग्रामीण पत्रकार एशोशियेशन उत्तर प्रदेश के संस्थापक बाबू बालेश्वर लाल जी एक व्यक्ति नहीं संस्था थे । उनके जीवन के मूल सिद्धान्त ग्रामीण पत्रकार बिना शिनाख्त के नहीं रहे के लिए उनके द्वारा प्रस्तावित योजना को प्रदेश सरकार ने स्वीकारा। मगर इससे पहले वो 27 मई 87 में स्वर्ग सिधार गए ।
ये बात आगरा जिला इकाई द्वारा आयोजित वर्चुअल संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्रदेश के महासचिव व राष्ट्ररीय संयोजक देवी प्रसाद गुप्ता ने कही । उन्होंने संस्थापक के साथ के अल्प समय के साथ को विस्तार से आपस में बांटा । उन्होंने आगरा इकाई को इस कार्य क्रम को आयोजित कराने पर धन्यवाद देते हुए कई और बातें बताईं।

ग्रा प ए को 95 में मान्यता व 2001 में स्थायी समिति में बैठने के हक की मान्यता मिलने की जानकारी देते हुए प्रदेश के उपाध्यक्ष शंकर देव तिवारी व संगठन मंत्री नरेश सक्सेना ने भी पुष्पांजलि दी। उन्होंने दायित्व व समय की पुकार पर बात करते हुए कहा कि अब एकता दिखाने की जरूरत का वक्त है। श्री तिवारी ने मान्यता पर जो शासनादेश में भ्रांतियां व्यप्त हैं उन्हें कैसे दूर हों के लिए प्रदेश अद्ध्यक्ष सौरभ कुमार के नेतृत्व में काम चल रहा है । सक्सेना ने संस्थापक को नमन किया व संगठन पर प्रकाश डाला । जिलाद्ध्यक्ष श्याम सुंदर परासर ने संस्थापक को पत्रकारों का पिता कहते हुए कहा कि ग्रमीण पत्रकार को पहचान पत्र उन्होंने दिलवाया। जिले के महासचिव रामहेत व राजेश शर्मा व सोनू सिंघल कोषाध्यक्ष ने भी नमन किया । इस समय संत कुमार भारद्वाज , अतुल गुप्ता, नरेश राजपूत , विष्णु शिकरवार श्रीकांत परासर चोब सिंह आदि हिमांशु शर्मा गोविन्द परासर
राजेश चाहर, मोहम्मद इस्माइल, अब्दुल सत्तार, अमित शुक्ला, प्रमोद उपाध्याय, सुरेश जारोलिया, रामकिशन मंगल, दिलीप गुप्ता, डॉक्टर राजपाल भारद्वाज, मुकेश पाराशर, नीरज परिहार, चोब सिंह सक्सेना, प्रमेंद्र फौजदार, प्रमोद सिंघल, राजेंद्र शुक्ला, मनीष उपाध्याय, अशोक शर्मा, ओमप्रकाश सविता, सत्यदेव पाराशर, सुरेश राजपूत
ने भी नमन किया । कार्यक्रम ठीक 11 बजे शुरू होकर 12 बजे दो मिनट मौन श्रद्धांजलि दे सम्पन्न हुआ ।
अंत में जिलाद्ध्यक्ष ने प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ जिले के लोगों को कोरोना से सामना करने की अपील के साथ धन्यवाद ज्ञापित किया । गोष्ठी की तकनीक सोनू सिंघल व छायांकन श्याम सुंदर परासर का रहा ।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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