
बीमार मां की सेवा करते हुए भी जारी रखी थी पढ़ाई, रेहाना बशीर बनीं जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले की पहली महिला आईएएस
संघर्ष से सफलता की शिखर पर पहुंचने वाली कई महिलाओं की कहानी हमने अब तक आपको बताई है। आज इस कड़ी में हम आपको बताने जा रहे हैं रेहाना बशीर के बारे में। सबसे पहले आप यह जान लीजिए की रेहाना बशीर को जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले की पहली महिला आईएएस होने का श्रेय हासिल है। लेकिन रेहाना बशीर का यह सफर इतना आसान नहीं रहा है। रेहाना जब कम उम्र की थीं तब ही उनके पिता का निधन हो गया था। मां ने बड़ी ही मुश्किल हालातों में उनको पढ़ाया। घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी और रेहाना इस बात को समझ चुकी थीं। लिहाजा उन्होंने खुद को पढ़ाई-लिखाई में झोंक दिया ताकि जिंदगी में कुछ बड़ा कर सकें।
पढ़ाई-लिखाई को लेकर गंभीर रेहाना ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद मेडिकल की परीक्षा दी और उनका चयन भी हो गया। तेज-तर्रार रेहाना ने मेडिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर ली। रेहाना जब मेडिकल साइंस से ग्रेजुएशन कर रही थी, तब उन्होंने अपने आसपास समाज की परेशानियों को देखा। ऐसे में उन्होंने सोचा कि अगर वह सिविल सर्विस में जाएंगी, तो उनकी परेशानियों को दूर कर सकती हैं।
इसी को सोचकर उन्होंने यूपीएससी में जाने का मन बनाया। हालांकि यह फैसला उनके लिए काफी कठिन था क्योंकि वह ग्रेजुएशन के बाद मेडिकल साइंस के पीजी का एंट्रेंस एग्जाम पास कर चुकी थीं। अब उनके सामने दो विकल्प थे। या तो पोस्ट ग्रेजुएशन कर लें या यूपीएससी की तैयारी। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया।
लेकिन रेहाना के लिए चुनौतियां यहीं खत्म नहीं होती। बेहतर तैयारी के लिए रेहाना के पास ना तो इंटरनेट सेवा उपबल्ध थी और ना ही बेहतर कोचिंग। लेकिन धुनी रेहाना ने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दी। उन्होंने पढ़ाई-लिखाई में खुद को व्यस्त रखा। एक साक्षात्कार में रेहाना ने बताया था कि ‘जब मैं यूपीएससी की तैयारी कर रही थी उस वक्त उनकी मां की सर्जरी हुई थी। मुझे दिन-रात उनकी सेवा करनी थी और उनका खयाल रखना पड़ा था। इसके बावजूद मैंने अपनी तैयारी जारी रखी।’