
जिला पंचायत चुनाव परिणाम- सत्तापक्ष की साख पर संकट
एटा- सत्ता की अनुकूलता के चलते जिला पंचायत पर, अपने दखल का सपना सँजोनेवाली भाजपा के मंसूबों पर, विपरीत परिणामों ने पानी फेर दिया है। अब वह जिला पंचायत अध्यक्ष पद को निर्विरोध सपा के पक्ष में जाने से रोकने की कोशिश में है। ताकि, किसी तरह मुकाबले से बाहर दिखाई न दे। किन्तु उसकी इस सियासी चाल से भी, उसकी साख पर गहराता संकट कम होता दिखाई नहीं दे रहा।
सत्ता पर बरकरार बीजेपी इस बार जिला पंचायत पर अपने कब्जे को लेकर आस्वस्त थी। इसीलिए इस प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव को काफी गंभीरता से लेते हुए उसने बढ़चढ़ कर तैयारी की थी। एक-2 सीट पर गहन मन्थन चिन्तन के बाद प्रत्याशी तय किया गया था। दूसरी ओर उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी सपा में टिकिट को लेकर घमासान की स्थिति थी। अधिकांश सीटों पर सहमति न बन पाने के चलते सपा के ही बागी प्रत्याशी मुकाबले में उतर गए थे। सपा की इस अंतर्कलह ने तो बीजेपी के सपनों को जैसे पँख ही लगा दिए थे। अतः प्रचार भी पूरे दमखम के साथ किया गया था। किन्तु इतना सब कुछ होते हुए भी परिणाम पूर्णतः भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध आए। यहाँ तक कि कई सीटों पर तो मुकाबला सपा के अधिकृत प्रत्याशियों व बागी प्रत्याशियों के बीच ही हुआ। भाजपा मुकाबले में ही नहीं दिखी।
30 सदस्यों वाली जिला पंचायत में वह सिर्फ 3 सीटें ही हाँसिल कर पाई। इनमें भी एक विवादित सीट के लिए उसे धरना देना पड़ा। कुल मिलाकर जनादेश समाजवादी पार्टी के पक्ष में रहा। जिसे सपा द्वारा 2022 का ट्रेलर बताया जा रहा है। जबकि भाजपा का मानना है कि, जिला पंचायत परिणामों को 2022 से जोड़ना बेमानी है।
2022 तो अभी दूर की कौड़ी है, किन्तु जिला पंचायत चुनाव परिणाम भाजपा के गले का गर्म दूध बना हुआ है। जिसे न निगलते बन रहा है और न उगलते। अध्यक्ष पद निर्विरोध जाता है तो भी उसकी साख को खतरा है और यदि चुनाव होता है तो भी जमानत जब्त होने का अंदेशा। ऐसी स्थिति में उसकी उम्मीद सपा के इक्का दुक्का उन असन्तुष्ट बागियों पर टिकी हुई है जो महत्वाकांक्षा के अति उत्साह में बड़े ख्वाब देखने लगे हैं। किन्तु जानकार सूत्रों का मानना यह है कि, उन्हें भी सियासत के बदलते करबट की संभावना के मद्देनजर, अपने राजनीतिक भविष्य के लिए सौ बार सोचना पड़ेगा।
अब देखना यह है कि, भारतीय जनता पार्टी, जिला पंचायत अध्यक्ष पद, समाजवादी पार्टी की झोली में निर्विरोध जाने देती है अथवा विरोध पूर्वक…
आदित्य यादव
प्रधान संपादक
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