
अपनी ही सरकार के खिलाफ बैठे धरने पर
एटा। आज एक अजीब वाक्या हुआ। एटा जनपद के विधायक, मंत्री, जिलाध्यक्ष व भाजपा के अन्य नेता अपनी ही सरकार के खिलाफ न्यायालय के गेट के सामने सड़क पर बैठ गये। वजह थी त्रिस्तरीय चुनाव में प्रशासन द्वारा हुई बेईमानी व अनियमितता। ज्ञात हो कि अब पंचायत चुनाव की धांधली को लेकर भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष व अन्य नेताओं ने कहा कि हमारी सरकार में हम लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इसी बात को लेकर एटा जिलाधिकारी के पास न्यायालय के बाहर अपनी ही सरकार में भाजपा नेता धरने पर बैठ गए। जब सत्ता के लोग ही अपनी बात मनवाने के लिए धरना दे रहे हैं तो सोचो आम आदमी को न्याय मिलना दूर की कौड़ी के समान है उसे तो भाजपा सरकार में न्याय कभी भी नहीं मिल सकता? इन नेताओं और मंत्री ने यह सिद्ध कर दिया।
एक और बात बताना जरूरी है कि यह लोग अपने स्वार्थ के लिए धरने पर बैठे हैं। जैसा कि पता है कि कोविड मरीज जो प्रतिदिन मर रहे हैं और उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है तो इसलिए अगर धरने पर बैठते तो ज्यादा सही था। बल्कि इनको तो अपनी महत्वाकांक्षायें पूरी करनी हैं। दूसरी बात है कि डा0 विभा चहल को एटा का डीएम भी इन्हीं की पार्टी ने बनाकर भेजा। अगर इनकी मानें तो डीएम भ्रष्ट हो सकती हैं लेकिन एटा शहर में भेजने वाले भी तो यही भाजपाई हैं, वो कौन हुए फिर? बरहराल इससे पूर्व भी एक भाजपा नेता पर डीएम को हटाने में करोड़ों रूपये लेने का आरोप भी लग चुका है।
अब बताते हैं कि धरना देने वालों में एटा जिला प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति, मारहरा विधायक वीरेन्द्र लोधी, जिलाध्यक्ष सन्दीप जैन, जिला चुनाव प्रभारी पंकज गुप्ता सहित कई भाजपाई थे तथा इन लोगों ने जिला पंचायत वार्ड संख्या 10 पर हेराफेरी का आरोप लगाया था।