वक़्फ़ की संपत्ति का हिसाब लेगे राजा खान….

वक़्फ़ की संपत्ति का हिसाब लेगे राजा खान….
कोई राजा खान है इन्होने अपनी फेसबुक आई डी पर पोस्ट डाली है की

आगरा शहर का ऐतिहासिक फूलो के ताजिये पर लाखो का चंदा आता है उसका हिसाब लिया जाय और उस पैसे से महामारी में ऑक्सीजन मंगा कर गरीबो ज़रूरत मंदो की मदद की जाय बगैरह बगैरह

मेरा इनसे कहना है की सिर्फ फूलो के ताजिये के चंदे चढ़ावे आमंदनी से ही इनको मतलब है इनके अलावा

1 आगरा की शाही ज़मा मस्जिद.
2 सगीर फातिमा कॉलेज
3 नई आबादी करबला
4 दरगाह अबुल उलाह
5 दरगाह जलाल बुखारी
6 दरगाह अहमद बुखारी
7 दरगाह अहमद शाह
8 दरगाह दादा पीर पल्ली पार
तमाम आगरा के कब्रिस्तान मस्जिदे दुकानात मय मकानात
आदि

पर भी तो लाखो की आमंदनी होती है

और आज तक उक्त वक़्फ़ संपत्ति की आमंदनी से कोई कार्य कोम के लिये नहीं किया गया है

1 आगरा में कोई मुस्लिम मुसाफिर खाना नहीं है

2 आगरा में कोई मुस्लिम यूनिवर्सिटी & कॉलेज नहीं है

3 आगरा में कोई मुस्लिम फ्री अस्पताल नहीं है

आदि………………….नहीं है

उपरोक्त वक़्फ़ संपत्ति अल्लाह और गरीब मुस्लिम कोम की है
लोगो ने इसी लिये उपरोक्त संपत्ति को वक़्फ़ किया था की इसकी आमंदनी से गरीब लाचार बे सहारा यतीम बेवा आदि की मदद की जा सके
यह किसी एक के हड़पने अपना घर भरने के लिये नहीं है

उपरोक्त समस्त संपत्ति अलल ख़ैर के रूप में दर्ज है यह कोई अलल औलाद वक़्फ़ नहीं है की कोई एक इंसान ही खानदान दर खानदार इसको खुर्द बुर्द करता रहे..

कोई भी व्यक्ति उपरोक्त संपत्ति का ज़िम्मेदार वक़्फ़ बोर्ड द्वारा बन कर आ सकता है ऐसा मेने( वक़्फ़ एक्ट )
(वक़्फ़ क़ानूनी किताब )
में पड़ा है

पर कोई ईमानदार इंसान इन सबकी ज़िम्मेदारी लेना नहीं चाहता है या समझो की इनसे रंजिश लेना नहीं चाहता है

सवाल यह है की
यह जो लोग है जो फेसबुक व्हाट्सप्प के आशिक़ है
इनको फेसबुक और व्हाट्सप व्हाट्सप्प खेलने से बोह्त मज़ा आता है

ज़मीनी तोर पर यह लोग कोई कार्य नहीं करना चाहते है बस एक दूसरे की टांग खींचना ही समाज सेवा समझते है

क्युकी यह फ्री है इनके पास कोई काम नहीं है इसलिये एक दूसरे के कामों में टांग अड़ाते है..

क्युकी अगर यह समाज सेवी और कोम के ज़िम्मेदार हमदर्द होते तो

आगरा में तमाम वक़्फ़ कब्रिस्तान की संपत्ति पर निर्माण कब्ज़े अतिक्रमण होते रहते है जिनको सिर्फ मेरे द्वारा ही रोका जाता रहा

आज तक तो यह लोग मेरी मदद को आगे आये नहीं अगर यह कोम के इतने ही हमदर्द है तो इस मुहीम में आगे क्यों नहीं आते है..

हलाकि इन वक़्फ़ माफियाओ से निपटने के लिये स्वम् ही सच्छम हू

परन्तु आप कोम के हमदर्द बन रहे हो तो आगे आओ और भेद भाव मत करो जितने भी वक़्फ़ माफिया है जो अपने बाप दादा की संपत्ति समझ कर वक़्फ़ को खुर्द बुर्द कर रहे है उन सब के खिलाफ आवाज़ उठाओ…

एक संगठन बनाओ उसमे अच्छी छवि के ईमानदार कोम के हमदर्द लोगो को रखो और आओ मेरे पास

बोर्ड द्वारा नई कमेटी का गठन कराया जाना कोई बा मुश्किल कार्य नहीं है

हमारे भारत के संबिधान में बोह्त ताक़त है फिर तुम क़लम की ताकत देखना..

इंशाअल्लाह आय से अधिक संपत्ति की जाँच बैठा कर अवैध संपत्ति जब्त करायेगे
इंशाअल्लाह रासुका जैसी कठोर कानूनी कार्यवाही करा कर जेल भेजेंगे और एक एक पायी का हिसाब भी ले लेगे

परन्तु संबिधानिक कानूनी प्रकरिया के तहत
यह सभी कार्य फेसबुक व्हाट्सप्प पर बकलोती करने से नहीं होगा इसके लिये ज़मीनी स्तर से नियमानुसार कार्यवाही की जायगी तब ही कोई कार्य हो पाएगा

किसी एक के खिलाफ बोलना मेरे हिसाब से कतई सही नहीं है

फिर भी मेरी बात का किसी भाई को बुरा लगा हो तो माज़रत के साथ माफ़ी चाहता

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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