बांस न बल्ली बढ़ते जा रहे कंटेनमेंट जोन पखवाड़ेभर में 63 से बढ़कर 415 तक पहुंची

बांस न बल्ली बढ़ते जा रहे कंटेनमेंट जोन
~पखवाड़ेभर में 63 से बढ़कर 415 तक पहुंची संख्यादूर से कंटेनमेंट जोन को पहचानना भी मुश्किल~
एटा: इस साल जिस तेजी के साथ कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है, उसी के अनुरूप कंटेनमेंट जोन की बढ़ती संख्या संक्रमण के दायरे को स्पष्ट कर रही है। हाल यह है कि एक पखवाड़े में ही 352 नए कंटेनमेंट जोन बनने से संख्या 415 तक पहुंच चुकी है। उधर इन क्षेत्रों की पहचान करना भी मुश्किल है, क्योंकि इस बार कहीं भी न तो बैरीकेडिग है और लोगों ने भी बांस-बल्लियां तक नहीं लगाईं।

पिछले साल कोरोना संक्रमण का दायरा जिले में सीमित रहा। वहीं प्रशासन द्वारा कंटेनमेंट जोन से संक्रमण आगे न बढ़ने देने के लिए काफी इंतजाम भी किए थे। जिस गली-मुहल्ले में भी पाजिटिव मिला, उसी क्षेत्र के 200 मीटर दायरे को कंटेनमेंट जोन के तहत आने जाने की पाबंदी के लिए बैरीकेडिग या बांस-बल्ली लगाते हुए पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया। इस बार जितनी तेजी के साथ कंटेनमेंट जोन बढ़ रहे हैं, उन हालातों में प्रशासन सिर्फ होम आइसोलेट लोगों के घर पर पोस्टर चिपकवाने तक सीमित है। कहीं भी कंटेनमेंट जोन में आने जाने की कोई रोक टोक नजर नहीं आ रही। खास बात तो यह है कि कंटेनमेंट जोन की सूची निकायों तथा संबंधित क्षेत्र के पुलिस प्रशासन को भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। यही वजह है कि इन क्षेत्रों में बैरीकेडिग या बांस-बल्लियों की सुरक्षा तो दूर सैनिटाइजेशन का कार्य भी प्राथमिकता पर नहीं हो पा रहा। यूं कहा जाए कि कंटेनमेंट जोन पूरी तरह पाबंदियों से मुक्त हैं। ऐसा व्यवस्थाएं बता रही हैं। इस बार कंटेनमेंट जोन क्षेत्रों में स्थानीय लोग भी बाहरी लोगों के आने जाने की चिता को लेकर अपने स्तर से भी बांस-बल्लियां लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। इस हाल में नहीं लगता कि संक्रमण का दायरा फिलहाल सिमटेगा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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