Lucknow News: खाली पड़े हैं बेड, फिर भी लौटाए जा रहे मरीज, लखनऊ के लोहिया संस्थान का हाल

Lucknow News: खाली पड़े हैं बेड, फिर भी लौटाए जा रहे मरीज, लखनऊ के लोहिया संस्थान का हाल

लखनऊ में केकेसी के शिक्षक विजय श्रीवास्तव के पिता बीएन श्रीवास्तव (90) की शनिवार सुबह सांस फूलने लगी। लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में ले जाने पर बेड फुल होने का टका सा जवाब दे दिया गया। करीब 45 मिनट तक पिता को ऐंबुलेंस में रखकर विजय ने अधिकारियों से गुहार लगाई। इसके बाद इमरजेंसी में लिया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

यह अकेला मामला नहीं है। लोहिया संस्थान की इमरजेंसी पहुंचने वाले कई मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। जबकि संस्थान में ही सेकेंड फ्लोर पर स्थित मेडिसिन वॉर्ड में बेड खाली पड़े हैं। एक मरीज ने रविवार को एनबीटी को फोटो भेजकर हकीकत का खुलासा किया। मेडिसिन विभाग में ही करीब बीस खाली बेड खाली पड़े हैं। हर बेड तक ऑक्सिजन की पाइप लाइन तक है। सिर्फ हाई फ्लो मीटर नहीं लगा होने से मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
कोविड के लक्षण वाले मरीजों को लौटाया जा रहा है। अगर सभी बेड पर ऑक्सिजन सपोर्ट के मरीज भर्ती कर लेंगे तो ऑक्सिजन की कमी हो जाएगी। मैनपावर भी कम है। कई संक्रमित भर्ती हैं जिन्हें स्वास्थ्य विभाग शिफ्ट नहीं कर रहा।
डॉक्टर राजन भटनागर, सीएमएस, लोहिया संस्थान
एक घंटे में लग सकते हैं मीटर
बाजार में एक हजार रुपये में हाई फ्लो मीटर मिलता है और सभी बेड पर महज एक घंटे में लग जाएगा। संस्थान के पास मीटर भी मौजूद होंगे। इसके बावजूद गंभीर मरीजों को बेड खाली न होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है।

हॉस्पिटल ब्लॉक में 400 बेड, सब खाली
इमरजेंसी में गंभीर मरीज दम तोड़ रहे हैं। तमाम स्ट्रेचर पर हैं। संस्थान के हॉस्पिटल ब्लॉक में करीब 400 बेड हैं। सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी, ईएनटी आदि सभी में मरीजों की भर्ती बंद है। ओपीडी भी बंद हैं। ऐसे में आधे से ज्यादा बेड खाली है और सभी पर ऑक्सिजन की व्यवस्था है। संस्थान में ऑक्सिजन प्लांट भी लगा।
मेडिसिन में एक डॉक्टर के संक्रमित होने और दो के कोविड में ड्यूटी के कारण कई दिन से महज एक डॉक्टर 24 घंटे ड्यूटी कर रही थीं। संस्थान में कुल 134 डॉक्टर हैं, जिनमें 40 नॉन क्लिनिकल हैं। सौ से कम डॉक्टर में कोविड हॉस्पिटल और गायनकॉलजी में भी टीम बनाकर ड्यूटी लगाई जा रही है। इमरजेंसी में ऑक्सिजन की कमी है। मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में ज्यादा मरीज भर्ती करने पर दिक्कत बढ़ जाएगी।
डॉक्टर ए.के. सिंह, निदेशक, लोहिया संस्थान

इसके बावजूद इमरजेंसी में 50 मरीज होने के बाद बाकी को बेड खाली न होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है। जबकि इमरजेंसी के मरीजों की हालत स्थिर होने के बाद विभागों में पड़े खाली बेड में ट्रांसफर किया जा सकता है। इससे इमरजेंसी भी खाली रहेगी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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