
अलीगंज में बालकराम की मौत के मामले में डीएम-एसएसपी तलब
एटा। मानवाधिकार आयोग ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 17 मई को आयोग में तलब किया है। मामला सात वर्ष पुराना है। थाना अलीगंज पुलिस पर वर्ष 2014 में एक युवक की लॉकअप में पीट-पीट कर हत्या करने का आरोप लगाया गया था। परिजनों द्वारा किए गए हंगामे के बाद पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई गई थी। यह वीडियो पुलिस रिकॉर्ड से गायब हो गया।
जिला मैनपुरी के थाना कुरावली क्षेत्र के गांव भोजपुर निवासी बालकराम 22 जुलाई 2014 को साइकिल से अलीगंज में बाजार करने आया था। परिजनों का आरोप था कि गांव अकबरपुर के पास खेरिया के बाग के समीप अलीगंज थाना के तत्कालीन प्रभारी आरके अवस्थी, दरोगा राजकुमार, सिपाही ओमवीर, प्रवीण आए और बालकराम को गाड़ी में डालकर थाना ले गए। यहां आरोप है कि चारों ने उसकी पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई।
बालकराम की मौत के बाद परिजनों ने 23 जुलाई को एटा-अलीगंज मार्ग पर जाम लगा दिया था। आरोप था कि बालकराम का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है, वही पुलिस ने उसका शव अज्ञात में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम में बालकराम के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए थे। इस मामले की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता सुनील सिंह ने मानवाधिकार आयोग में की थी। जांच के बाद एएसपी राहुल कुमार ने भी स्वीकारा था कि पोस्टमार्टम की सीडी गायब हो गई है। इस मामले में अब मानवाधिकार आयोग ने 17 मई को डीएम और एसएसपी को आयोग में तलब किया है। कहा है कि इससे पूर्व यदि 10 मई तक अभिलेख और सीडी उपलब्ध करा दी जाती है तो व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जा सकती है।