
देखा जाये तो आग लगने की घटनाओं का उत्तराखंड से पुराना नाता रहा है। वन विभाग की मानें तो अबतक प्रदेश में 609 घटनाएं हुईं हैं जिससे राज्य में 1263.53 हेक्टेयर जंगल भस्म हो गये हैं और चार लोगों की मौत हुई है। जबकि कुछ सूत्र फरवरी महीने से अबतक आग लगने की कुल 983 घटनाएं होना बताते हैं। बीते 24 घंटों में हुई आग की 31 घटनाओं में 93 हजार 538 रुपये की वन संपदा स्वाहा हो गयी है। अब तो आग ने भयावह रुख अख्तियार कर लिया है। सबसे अधिक तो वन्य जीवन पर इसका असर हुआ है जिनका जीवन ही खतरे में पड़ गया है। अभी तक यह समझ से परे है कि जब आग की घटनाएं यहां इतनी बडी़ तादाद में हर साल होती हैं तो सरकार क्या करती है। इससे ऐसा लगता है कि सरकार को न तो जंगलों की चिंता है, न पर्यावरण की और न वन्य जीवों की जो पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निबाहते हैं। यह सरकारों के नाटारेपन का जीता जागता सबूत है।