एटा में नहीं कोई थियेटर, कैसे निखरें रंगमंच की प्रतिभाएं

एटा में नहीं कोई थियेटर, कैसे निखरें रंगमंच की प्रतिभाएं
एटा। जिले में न तो रंगमंच के लिए कोई थियेटर है और न ही कोई संस्था सक्रिय है। ऐसे में यहां नाट्य विधा पूरी तरह से अलोप है। केवल स्कूल-कॉलेजों में बच्चे शिक्षकों के निर्देशन में छोटे-छोटे नाटक करते हैं, पर युवा इससे रंगमंच के माध्यम से रुपहले पर्दे पर पहुंचने की ख्वाहिश को अंजाम तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
कृषि बाहुल्य जिला में नाट्य विधा के लिये न तो कोई संस्था कार्यरत है और न किसी प्रकार की गतिविधियां संचालित हैं, इसके कारण जिले में सांस्कृतिक कार्यक्रम न के बराबर रह गए हैं। रंगमंच की बात की जाए तो विद्या भारती द्वारा संचालित स्कूलों में ही केवल नाटक आदि कार्यक्रम होते हैं। वहीं यहां जन नाट्य संघ जैसी संस्थाओं की मौजूदगी भी नहीं दिखती है। यही कारण है की यहां की प्रतिभाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिये आगरा, अलीगढ़, दिल्ली जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है।
भारतेंदु नाट्य अकादमी में किया है आवेदन
जहां पूरी दुनिया ग्लोबलाइजेशन की तरफ चल रही है, वहीं एटा जनपद अपने पिछड़ेपन की तस्वीर बयान करता नजर आता है। मैने 3 वर्ष पहले बतौर मॉडलिंग अपना कैरियर शुरू किया था, मॉडलिंग के साथ मेरी रुचि एक्टिंग में रही है। टीवी एक्ट्रेस बनना मेरा सपना है। मैने कई मंचों से एटा का नाम रोशन किया है। परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं होने के उपरांत भी मेरी मां ने किसी साधन की कमी नहीं होने दी। मुझे अपना मॉडलिंग, एक्टिंग में कैरियर बनाने के लिए घर परिवार से आजादी मिलना आसान नहीं था, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैने भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ में आवेदन किया है, किंतु कोरोना की वजह से अभी तक सब रुका हुआ है। थियेटर में डिप्लोमा करके इस क्षेत्र में जाने का मेरा सपना है। गांव की सामाजिक पृठष्भूमि से निकलकर अपने और परिवार के सपने पूरे करके माता पिता का नाम रोशन करना ही मेरे जीवन का लक्ष्य है।

  • नैना राजपूत, मॉडल एवं थियेटर कलाकार
    एटा में बनना चाहिए प्रेक्षागृह
    मैंने बतौर डायरेक्टर मिस एटा, मिस यूपी और अनेकों फैशन शो इवेंट के सफल आयोजन किए हैं। इस दौरान मैंने पाया एटा में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है यहां प्रतिभा तो हैं लेकिन सरकार द्वारा किसी भी प्रकार के साधन उपलब्ध नहीं कराए गए है। शहर में यदि कोई प्रेक्षा गृह सरकार की योजना द्वारा बनवाया जाता है तो निश्चय ही यहां पर तमाम विलुप्त होती विधाओं को पुनर्जीवित किया जा सकता है। थिएटर एक ऐसा माध्यम है जिससे रंगमंच में प्रतिभागी बनकर कलाकार अपनी प्रतिभा को न केवल निखारते हैं बल्कि देश और दुनिया के पटल पर अपनी प्रतिभा को रखने के लिए भी तैयार करते हैं। मेरी सरकार एवं उनके प्रतिनिधियों से अपील है कि इस तरह की किसी सरकारी योजना की सहायता से जनपद में प्रेक्षागृह स्थापित किया जाए, जिससे कि जनपद की प्रतिभाओं को अपना हुनर तराशने का अवसर मिल सके।

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks