वित्तीय संकट की मार झेल रहे मध्य प्रदेश पर खनिज विभाग तुला सरकार को चूना लगाने

*खनिज के खेल में हलाकान प्रशासन: वित्तीय संकट की मार झेल रहे मध्य प्रदेश पर खनिज विभाग तुला सरकार को चूना लगाने*
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खनिज के खेल में प्रशासन हलाकान है l कोरोना महामारी के चलते जहां एक ओर मध्य प्रदेश सरकार वित्तीय संकट में है और शासन के आय के सभी स्रोत 22 मार्च से पूर्णता बंद है। शासन जनता को सुविधाएं प्रदान करने हेतु भरसक प्रयास भी कर रही है। लेकिन छतरपुर जिले के खनिज विभाग के सरकार के ही नुमाइंदे सरकार को चूना लगाने में लगे हुए हैं। बीते सप्ताहों में जहां सरकार को करोड़ों रुपए राजस्व प्राप्त होना था लेकिन खनिज विभाग के नुमाइंदों के भ्रष्टाचार के चलते सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।
खनिज साधन विभाग मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई के पत्र क्रमांक 422 दिनांक 22.4.2020 के द्वारा मुख्य एवं गौण खनिजों को पुन: संचालित करने का आदेश जारी किया था। और इसी तारतम्य में पत्र क्रमांक दिनांक 23.4 .2020 के द्वारा मुख्य एवं गौण खनिजों की ईटीपी जारी करने के निर्देश दिए गए थे। ताकि शासन को राजस्व की प्राप्ति एवं लोगों को सुविधा अनुसार मुख्य एवं गौण खनिज प्राप्त हो सके। लेकिन खनिज विभाग ने अपने भ्रष्टाचार की नीति के चलते इन आदेशों को ताक पर रख दिया है। जिले भर के सभी पट्टेद्वारों को ?100 के स्टांप पर एक घोषणापत्र और एक आवेदन पत्र जमा करने के निर्देश दिए थे जिसके चलते जिले के सभी पट्टे धारियों ने स्टांप एवं आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप में लगभग 15 दिन पूर्व जमा भी कर दिए गए लेकिन खनिज विभाग इनमें अभी पाटीदारों से जमकर भ्रष्टाचार में लगा हुआ है। और बताया तो यह भी जाता है कि भ्रष्टाचार की चांदी की जूती पहनाने वाले पट्टेद्वारों को ही ईटीपी जारी की जा रही है।
इससे सरकार को वित्तीय संकट के दौरान छतरपुर खनिज विभाग के द्वारा करोड़ों रुपए का नुकसान जानबूझकर दिया जा रहा है और प्रमुख सचिव के आदेश को दरकिनार कर खनिज विभाग अपने भ्रष्टाचार में तल्लीन है। जिससे जिले भर के लोगों को निर्माण कार्य मैं परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी एक माह पश्चात बारिश का मौसम आते ही ग्रामीणों के कुएं निर्माण कार्य जल संरक्षण के कार्य भवन निर्माण सहित आदि कार्य अधिकारियों के भ्रष्टाचार नीति के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। गांव में रहने वाले ग्रामीण जिन्होंने अपनी खून पसीने की कमाई से कुआं खुदवा लिए हैं। उन्हें कुए बंधवाने के लिए पत्थर एवं गिट्टी प्राप्त नहीं हो पा रही है। साधे बारिश के मौसम की निकटता को देखते हुए उन्हें अपने हुए का भविष्य अधर में लटका हुआ नजर आ रहा है। शासकीय कार्यों में भी कपिलधारा कूप और अन्य निर्माण कार्यों के लिए भी मुख्य एवं गौण खनिजों की प्राप्ति नहीं हो पा रही है। जिससे शासकीय कार्यों को भी नुकसान हो रहा है। लेकिन इन सब की परवाह किए बिना खनिज विभाग में सेक्स फाइल है धूल खा रही है यदि यही आलम रहा। तो वह दिन दूर नहीं जब मध्य प्रदेश सरकार पर वित्तीय संकट और गहराता जाएगा और प्रदेश की जनता परेशानियों की मार झेलने के लिए मजबूर होगी। जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश शासन के मुखिया शिवराज सिंह चौहान पर पडऩा स्वाभाविक है। समय चलते यदि सरकार नहीं चेती तो खनिज विभाग सरकार की आर्थिक संकट को दिन दूना रात चौगुना बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

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