
झीलों के नगर : उदयपुर के समीप स्थित है विश्व प्रभु श्रीनाथ जी की नगरी श्रीनाथद्वारा (राजस्थान).जो धर्म,
अध्यात्म , साहित्य, संस्कृति एवं कला की दृष्टि से विश्व में
अपना विशिष्ट स्थान रखती है.
एक समय ऐसा भी आया जब ब्रज भूमि पर विजातीय आक्रमणकारियों के आक्रमणहोने आरम्भ हुये और आतताइयों द्वारा यहां के मंदिर ,देवालय और ठाकुरद्वारों को ध्वस्त किया जाने लगा.
ऐसे में हमारे ब्रजस्थ मंदिरों में प्रतिष्ठित श्री विग्रह!
ब्रजभूमि को छोड़ कर देश के दूरस्थ विभिन्न सुरक्षित स्थानों पर चले गये. श्री गिरि-गोवर्धन के गांव के ऊंचे शिखर पर विद्यमान श्री नाथ जी! मेवाड़ क्षेत्र के राजाओं
को शुभाशीष प्रदान करने राजस्थान उदयपुर के(र्ाजसमंद) समीप पहुंचे अपने गोस्वामी आचार्यों एवं ब्रजबासी जनों के साथ एक ऐसे स्थान पर, जिसे हम “श्रीनाथद्वारा” नाम से जानते हैं.
आज इसी नगर में विराजमान हैं ब्रज भूमि से आये (हमारे ठाकुर जी)विश्व प्रभु श्रीनाथ जी महाराज!
जिनके दर्शन करने प्रति दिन, भारत के ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के कोने-कोने से ,श्रद्धालु भक्त जन श्रीनाथद्वारा पहुंच कर श्रीनाथजी के दर्शन करके स्वयं को धन्य मानते हैं.
इसी नगर में है एक साहित्यक और सांस्कृतिक संस्था है “साहित्य मंडल” जिसकी स्थापना सन१९३७
में हुई. इसके संस्थापक रहे हिन्दी के लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार, पत्रकार एवं लेखक श्री भगवती प्रसाद देवपुरा जी .
उनके अथक प्रयासों से “साहित्य मंडल” जैसी संस्था
साहित्य, संस्कृति, संगीत एवं कला के उन्नयन में विशिष्ट
संस्था बनकर फूली फली और भारत विख्यात् संस्था बनी.इस संस्था को भारतेन्दु हरिचंद्र , वियोगी हरि एवं
हिन्दी एवं ब्रजभाषा साहित्य सेवियों का आशीर्वाद और सहयोग मिला .
आज ये संस्था एक ऐसा बटवृक्ष! बन चुकी है, जिससे भारत की अनेकों सुप्रसिद्ध साहित्यक एवं सांस्कृतिक संस्थाएँ सम्बद्ध हैं. इस संस्था द्वारा वर्ष भर
अनेकानेक काकार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं__
- ०६ जनवरी को श्री भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति सम्मान.
**फाल्गुन कृष्ण सप्तमी को “पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह
***१४ सितम्बर :- हिन्दी लाओ देश बचाओ”.
उपरोक्त सभी समारोहो़ं के अवसर पर देश के
कोने-कोने के चुनिंदा लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यसेवियो़,कलावन्तों एवं अन्य सभी विशिष्ट विधाओं में पारंगत विभूतियों को पारम्परिक ढंग से
सम्मानित किया जाता है.
इस बार अभी दिनांक : ०५/०६ एवं ०७ मार्च, २०२१ को पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह के त्रिदिवसीय
कार्यक्रम में देश के कोने कोने से आईं विभिन्न विधाओं
की विभूतियों को आमन्त्रण दिया साहित्य मंडल” संस्था के वर्तमान प्रधान श्री श्याम प्रकाश जी देवपुरा ने.
प्रबन्धन में विशेष योगदान रहापीयूष देवपुरा का. “”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” विशेष सहयोगी रहेश्री रामेश्वर शर्मा ‘रामू भैय्या,
अंजीव अंजुम, हरिओम हरि और डॉ श्रीकृष्ण’शरद’.
सदैव की भांति सम्पूर्ण देवपुरा परिवार का इस साहित्यक एवं सांस्कृतिक यज्ञ में योगदान देता दिखाई दिया .
पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह में चंडीगढ़ (पंजाब )
के वरिष्ठ प्रोफेसर अमर सिंह वधान की उपस्थिति विशेष रही. कार्यक्रम में विट्ठल पारीक जैसै संचालक की कमी सबको सताती रही.
इस अवसर पर ब्रज के कलाकारों ने अपनी सुहानी
एवं मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से जन-जन का मन मोह लिया. सर्वश्री राधा गोविंद पाठक,रंगाचार्य लोकेन्द्र कौशिक, लावनी गायक हर प्रसाद राजपूत, कवि अटलराम चतुर्वेदी’अटल’, नवीन चंद चतुर्वेदी, पूर्णिमा शर्मा , तेजवीरसिंह’तेज’, डा.भगवान ‘मकरन्द’,अशोक अज्ञ,योगीराज ‘योग’ अंजीव अंजुम,शिवसागर शर्मा, हरिओम ‘हरि’ ,सोटानंद, नरेन्द्र ‘निर्मल’आदि के साथ ,संगीत निर्देशक अशोक कुमार शर्मा ‘नीलेश’,और (राधा स्वरूपा )भारती शर्मा और श्रीकृष्ण स्वरूप हनी ने. आनंद-रस की वर्षा कर ,ब्रजभूमि का गौरव बढाया.
पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह में विशेष उपस्थिति रही _
राम कथा के मर्मज्ञ और सुप्रसिद्ध वक्ता आचार्य श्री
मदनमोहन शर्मा,चंडीगढ़ के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ.अमर सिंह वधान, कोटा के वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार रामेश्वर प्रसाद ‘रामू भैया’,डॉ.इंदु चतुर्वेदी
मथुरा के अजय शर्मा संतोष, आदि की.
प्र
इस अवसर “मंच_साहित्य मंडल ” विषय पर पत्र-वाचन किया डॉ.श्रीकृष्ण ‘शरद’ ने. पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह में सम्मान के समय
साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा राजस्थान” के विश्व विख्यात
मंच पर मुख्य अतिथि एवं राम कथा मर्मज्ञ
आचार्य पं. मदन मोहन शर्मा एवं प्रोफेसर अमर सिंह वधान के साथ-साथ आकाशवाणी मथुरा-वृन्दावन के वरिष्ठ उद्घोषक (सेनि)डॉ.श्रीकृष्ण’शरद’ ने ब्रज के
प्रख्यात कलाकारों के सम्मान क्रम में विश्व प्रभु श्रीनाथजी की छवि प्रदान कर_
सुश्री भारती शर्मा ( राधाके स्वरूप में ),.
हनी शर्मा ( कृष्ण के स्वरूप में )
प्रगति शर्मा/ पूजा आचार्य (सखियां)
एवं हिमांशु
को साहित्य मंडल-प्रमुख श्री श्याम प्रकाश जी देवपुरा द्वारा सम्मानित किया .
प्रबंधन सहयोगी रहे श्री उमादत्त भारद्वाज.