
एटा।जब बाड़ ही खेत को खाने लगे या फिर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर उम्मीद किससे ?
हाल का मामला है जिससे प्रतीत होता है कि पुलिस थाने से ही दारू बिकने लगे तो फिर दारू माफियाओ को कौन रोकेगा ? ऐसा हाल अकेले एटा देहात कोतवाली का ही नहीं है प्रदेश के सब थानों का यही हाल है, सोचा था यह सरकार ये सब काले धंधे बन्द करा देगी लेकिन अब ऐसा संभव नहीं लगता जब कोतवाली से ही गलीच धंधो को हरी झंडी मिलती हो , कोतवाल ही माफिया बन जाए तो फिर क्या कहने ?
ऐसा नहीं है कि अगर अन्य थानों में भी ऐसी रेड पड़े तो अन्य छोटी छोटी मछलियों को पकड़ा जा सकता है ।
हरएक कोतवाली क्षेत्र में ऐसे गलीच धंधे बेरोकटोक अभी भी जारी है जिससे आमजन मानस को अपने जीवन की गाड़ी कमाई से हाथ धोना पड़ रहा है, समय रहते इन गलीच धंधों को बंद नहीं किया गया तो प्रदेश का भगवान ही मालिक है ।
ऐसे ही जैथरा थाने के परिक्षेत्र में खुलेआम जितने भी काले धंधे हैं बदस्तूर जारी है ।
आखिर कब बन्द होंगे धंधे कब पकड़े जाएंगे माफिया ?