
महा शिवरात्रिपर लगा शिव भक्तों का तांता
कैलाश मंदिर पर आज शिव भक्त एवं कांवरियों की अभूतपूर्व भीड़ दिखी प्रसासन भी पूरी मुस्तेदी के साथ शिव भक्तों की सुरक्षा में लगा रहा प्रशासन के मुस्तेदी की वजह से सिथतियाँ नियंत्रण में रही।
मंदिर के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी :
एटा शहर में स्थित इस मंदिर का निर्माण संवत 1924 में राजा दिलसुख राय बहादुर ने करवाया था | मंदिर निर्माण के साथ ही इसके आसपास के पूरे क्षेत्र का नामकरण भी कैलाशगंज हो गया है | धरातल से इस मंदिर की चोटी तक की ऊँचाई करीब 200 फुट है, जबकि शिवजी की चतुर्मुखी मूर्ति धरातल से लगभग सवा सौ फुट की ऊँचाई पर स्थित है | जमीन से लेकर मूर्ती तक का पूरा आधार ठोस है, धरातल से शिवजी की चतुर्मुखी मूर्ति तक के गर्भ स्थल में किसी प्रकार का खोखलापन नहीं है, इस ठोस गर्भ पर ही दीप के आकार में शिवजी के चारों दिशाओं में उभरे मुखों की सफ़ेद पत्थर से निर्मित मूर्ति रखी गयी है, मूर्ति के समीप ही सफ़ेद पत्थर से ही निर्मित नंदी की मूर्ति स्थापित है | इसके अलावा मूर्ति की दो विपरीत दिशाओं उत्तर व दखिण में क्रमश: गणेश व माँ पार्वती की सफ़ेद पत्थर से ही निर्मित आदमकद मूर्तियाँ स्थापित की गयी हैं | मंदिर की छत पर अजन्ता व अलोरा की तरह ही शानदार भित्ति चित्रों को उकेरा गया है, जिन्हें देखते ही श्रद्धालु खो जाते हैं | मंदिर के अन्दर पांच मंजिलों में अर्थात चतुर्मुखी मूर्ति की ऊँचाई तक 16 कमरे हैं | इसके अलावा मंदिर के धरातल के प्रांगण में एक ओर काफी विशाल सरोवर है जिसमें उतरने के लिए सीढ़ियाँ बनाई गयी हैं, सरोवर उपेक्षा के कारण ख़राब हालत में है | मंदिर के एक ओर बाग़ के लिए विशाल स्थान है, जो कि उपेक्षा का शिकार है |
१०८ सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं :
मंदिर में ऊपर चढ़ने के लिए श्रद्धालुओं को 108 सीढियाँ चढ़नी पड़ती हैं, सीढियाँ 70 फुट की ऊंचाई के बाद तीन भागों में विभक्त हो जाती हैं, सबसे बाईं ओर की सीढ़ियाँ मंदिर में ऊपर जाने के लिए व दायीं ओर की सीढ़ियाँ नीचे उतरने के लिए हैं जबकि बीच में विश्राम स्थल बनाया गया है जिनका इस्तेमाल चढ़ते वक्त थक जाने वाले यात्री करते हैं |
शिवरात्रि और सावन में लगता है मेला :
फाल्गुन माह में शिवरात्रि महापर्व और श्रावण मास के दौरान मंदिर में मेले लगते हैं, इन पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, सावन के पूरे माह में पड़ने वाले सोमवार को भक्तों की विशेष भीड़ रहती है | सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि के दौरान भक्तजन कांवरों में गंगाजल भरकर कोसों दूर की लम्बी पदयात्रा करके कैलाश मंदिर में शिवजी का जलाभिषेक कर मनौती मांगते हैं |
मंदिर के बारे में अन्य महत्वपूर्ण बातें :
- किवदंती के अनुसार कैलाश मंदिर के नीचे एक सुरंग है जो कासगंज तक खुदी थी, सुरंग का द्वार मंदिर के ठीक नीचे है लेकिन सुरंग का द्वार सालों से बंद है जिसके कारण किसी के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है की सुरंग कहाँ तक जाती है|
- भारत में कहीं भी नहीं है ऐसी शिवजी की चतुर्मुखी मूर्ती |
- सवा सौ फुट के ठोस गर्भ स्थल पर स्थित है अदभुत प्रतिमा |
- पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में नहीं है इतना उंचा शिवजी का मंदिर |
- धरातल से २०० फुट ऊंचा है कैलाश मंदिर |