
दारूल क़ज़ा व इफ़ता मसाजिद कमेटी भोपाल मप्र के काज़ी मुफ़ती साहेबान का एेलान – नाच गाना बेंड बाजा डीजे बजा या पटाखें फोड़े तो काज़ी नहीं पढ़ायेंगे निकाह : मो. तारिक़
भोपाल ! मध्यप्रदेश शासन अधीन मसाजिद कमेटी भोपाल के दारूल क़ज़ा व इफ़ता भोपाल (भोपाल, सिहोर व रायसेन) के काज़ी मुफ़ती साहेबान ने दिनांक 25 फ़रवरी 2021 को मिलकर यह तय किया है कि जिस शादी में नाच गाना होगा, बेंड बाजा डीजे बजेगा या पटाखें फोड़ें जायेंगे, पर्दा नहीं होगा, फिज़ूलख़र्ची होगी, रसमों रिवाज होंगे वहां पर काज़ी निकाह नहीं पढ़ायेंगे ! साथ : एहले मिल्लत ऐसी शादियों में शिरकत न करें !
बारात बिदअत, निकाह सुन्नत है ! निकाह हलका मस्जिद में आम करों ! घर से हो बिन जहेज़ के हो रूख़सती ! दावत सिर्फ़ वलीमा की !
छ: शरअई आमाल :-
दो फ़राइज़ : 1. ईजाब व क़बूल 2. दो गवाह ! एक वाजिब : 1. मेहर !
तीन सुन्नत : 1. ख़ुतबा निकाह 2. तक़सीम छुआराह 3. वलिमा !
बाकी अमल गैर शरअई खिलाफ़ सुन्नत ! फिज़ूलख़र्ची कर अल्लाह को नाराज़ न करें ! *मंगनी, उबटन, पहनावनी, मांग, दहेज, बारात व उसका खाना, चढ़ावा, निछावर सब गैर शरअई ! निकाह, मेहर और वलीमा शरियत लिहाज़ !* *शरअई मामलों में बिला वजह गुफ़तुगु न कर उल्मा ए इकराम से राय व तसदीक़ ज़रूरी !* *मो. तारिक़*