भक्ति, ज्ञान व वैराग्य का संगम है श्रीमद् भागवत कथा अनूप महाराज

*भक्ति, ज्ञान व वैराग्य का संगम है श्रीमद् भागवत कथा अनूप महाराज* जिला फर्रूखाबाद के पांचाल घाट मेला राम नगरिया में चल रही पाक्षिक श्रीमद् भागवत कथा एवं श्री राम कथा के प्रथम दिवस में असलापुर धाम से पधारे परमपूज्य कथा व्यास अनूप ठाकुर जी महाराज ने बताया कि भागवत का अर्थ है भ-भक्ति, ग-ग्यान व-वैराग्य, त-त्याग तप है भागवत श्रवण से भक्ति ज्ञान वैराग्य तप चारों और प्राप्त होते हैं भागवत जी का प्रथम श्लोक *सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे।तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुम:।।* प्रथम श्लोक का प्रथम शब्द है सच्चिदानंदरूपाय भागवत आरंभ हो रहा है और भागवत ने घोषणा की सत,चित और आनंद भगवान के तीन रूप हैं सच्चिदानंद रूपाय सत, चित और आनंद। भगवान के रूप को प्रकट किया। भगवान तक पहुंचने के तीन मार्ग है सत, चित और आनंद मनसा वाचा कर्मणा इन तीन रास्तों से आप भगवान तक पहुंच सकते हैं। आप देखना चाहें भगवान का स्वरूप क्या है तो भगवानका पहला स्वरूप है सत्य। जिस दिन आपके जीवन में सत्य घटने लगे आप समझ लीजिए आपकी परमात्मा से निकटता हो गई। सत भगवान का पहला स्वरूप है फिर कहते हैं चित स्वयं के भीतर के प्रकाश को आत्मप्रबोध को प्राप

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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