
*विपरीत धाराओं के नेताओ के सहारे से जिला पंचायत पर कब्जा करने की फिराक में बसपा,,,,।* *एक दूसरे के धुरविरोधी सहजाद व चो0 राजेन्द्र क्या कर पाएंगे बसपा को मजबूत,,,,।* हरिद्वार। अनवर राणा आज की राजनीति व नेताओ की नीति के सम्बंध में एक शायर ने क्या खूब पंक्ति लिखी,जो यहां फिट होती दिखाई दे रही है,,,,, *जमीर का जिंदा रहना ,खुद के जिंदा रहने से ज्यादा जरूरी है,,,,* उत्तराखण्ड की राजनीति में बड़ा मुकाम रखने वाले दो कद्दावर नेताओ की दोस्ती व बसपा पार्टी में एकजुटता से बहुजन समाज पार्टी कितनी मजबूत होगी यह तो भविष्य के गर्व में है। लेकिन दोनों ही नेताओ सहजाद व चो0 राजेन्द्र की अदावतें व तकरार भी क्षेत्र की जनता अभी भूली नही है। क्योंकि पूर्व कॉंग्रेस की सत्ता के सहारे जिला पंचायत की कुर्सी से समयावधि पूरी होने से पूर्व ही चो0 राजेन्द्र सिंह ने सहजाद की भाभी को अपदस्त करा अपनी ताकत का अहसास कराया था। चो0 राजेन्द्र की इसी अदावत के चलते निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष चो0 राजेन्द्र की भाभी को बदले की भवना से सहजाद ने भी भाजपा सत्ता का सहारा लेकर समय से पूर्व अपदस्त कराया है, ओर बाद में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में पाला बदलकर फिर राजेन्द्र सिंह समर्थित का साथ दिया जिसमें उन दोनों ही कद्दावर नेताओ को मुंह की खानी पड़ी। यहां यह कहना गलत नही होगा कि राजनीति में कब कौन किसका दोस्त बन जाये कुछ पता नही ,लेकिन अगर वोटर इस काम को करे तो गद्दारी का लक़ब इन नेताओं द्वारा नवाजा जाना आम बात हो गयी।