
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भ्रष्टाचार पर सुनवाई के बावत याचिका को पीआईएल के रूप में स्वीकार किया।
भ्रष्टाचार पर राजनीति व भाषण सभी पार्टियों के नेता देते हैं अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसे शामिल भी करते हैं लेकिन चुनाव के बाद भ्रष्टाचार का मुद्दा खत्म हो जाता है।
भ्रष्टाचारो की जांच के लिए जब सरकार के स्तर पर कोई नीति व कार्य प्रक्रिया निर्धारित नहीं की गई पत्र लिखकर देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर, एडवोकेट अगेंस्ट करप्शन सोसायटी ने इस मुद्दे को संज्ञान में लेकर अध्यक्ष एस के गौतम एडवोकेट ने एक याचिका उच्चतम न्यायालय में दाखिल की जिस पर जनहित के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने पिटीशन को पीआईएल के रूप में स्वीकार किया।
श्री गौतम ने कहा कि देश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो परन्तु जनता की शिकायतों को कोई भी संज्ञान में नहीं लेता जिस कारण जनता का शोषण दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसी बिन्दु को एडवोकेट अगेंस्ट करप्शन सोसायटी ने संज्ञान में लेकर पिटिशन उच्चतम न्यायालय में याचिका के रूप में दाखिल की थी। अब उम्मीद है कि भ्रष्टाचार के निराकरण व जनता के शिकायती पत्रों पर नीति निर्धारण होगा और कार्रवाई होगी जिससे समाज के सभी वर्गों का हित होगा।