नही थम रहा मंदिर क्षेत्र में दान पेटी के बाहर रुपया बटोरने का , इसको क्या कहेंगे चोरी या ? भक्ति भक्त ही निर्णय करे।
मथुरा गोवर्धन

माँ शारदा की पवित्र नगरी जो 52 शक्तिपिठो में एक है और सबसे बड़े भक्त आल्हा ऊदल के नाम देश व विदेश में विख्यात है और भक्तो की इतनी आस्था है कि इस कोरोना महामारी में भी जब से मंदिर खुला भक्त रेला रग है और भक्तो के शक्ति के आगे शासन के नियमो को भी भूलकर भक्त आशीर्वाद ले रहे है यह तक कि आने वाले कुछ दिनों में नए वर्ष 2021 का आगाज होने जा रहा जिस पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भक्तो की काफी भीड़ हो सकती है वही जो सबसे बड़ा मंदिर समिति जुड़ा खजाने से है जो नही थम रहा माँ शारदा के मंदिर क्षेत्र में खजाना चोरी का मामला, दिन दहाड़े सीसीटीवी कैमरा होने के बावजूद भी दान पेटी के बजाय पंडितो के जेब मे जा रहा, इसके पहले भी कई बार खबरों के माध्यम से समिति प्रशासक व एसडीएम को अवगत कराया गया था लेकिन आज भी क्या कोई इस पर शासकीय कार्यवाही हुई या नही ये गुप्त है किसी तरह की कोई सूचना नही जब कि माँ शारदा प्रबन्धक समिति की आय व खर्च इन्ही खजाना व दानपेटी में रुपया आने से होता है जिससे करीब 250 समिति कर्मचारियों की वेतन लाखो रुपये भुगतान भी किया जाता है लेकिन इसी तरह भक्तो का पैसा दान पेटी के बजाय इनके जेबो में जायेगा तो एक दिन समिति प्रबन्धक खुद अति गरीबी रेखा के कार्ड बनाकर सरकार से मांग करनी पड़ सकती समिति कर्मचारियों की भुगतान के लिए, जबकि दान मिलने वाली रकम से ही भक्तों के सुरक्षा व्यवस्था से लेकर सभी तरह की जरूरतों को पूरा किया जाता है यही नही मंदिर क्षेत्र में सैकड़ो समिति कर्मचारी डियूटी तो देते है लेकिन इस तरह की वारदातों पर नजर नही डालते जबकी इन्ही खजानों के भरने पर ही इनकी वेतन हर महीने मिलती है उसके बाद भी इसकी रखवाली नही कर पा रहे कितनी अजीब बात है कि हजारो रुपये वेतन के रूप में मिलने वाले खजाने उसकी रखवाली तक नही कर पा रहे या ये मन जाए कि समिति कर्मचारियों की मिली भगत से हो रहा वैसे डियूटी तो लगती है लेकिन मन्दिर के अंदर भक्तो को धक्का देकर बाहर निकालने के अलावा कोई काम नही कर पाते जिसका नतीजा दान पेटी तरस रहा है रुपया के लिए।