*ट्यूलिप स्कूल की नीचता..जिन्दगीयो से खिलवाड़*
ये विद्या के मंदिर है या उद्योग।
समय-समय पर अक्सर यह खबर आती रहती है निजी क्षेत्र में काम करने वाले कॉन्वेंट स्कूल जबरन उगाही के एक केंद्र बन गए है।
अभिभावक अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं
अभिभावकों की बच्चों को कॉन्वेंटेड बनाने की इस चाहत की पूरी कीमत बसूलते है यह विद्यालय ।
चलिए सामान्य दिनों में इस बात को मान भी लेते हैं कि विद्यालय प्रबंधन बच्चों को पठन-पाठन की अच्छी सुवधायी देते है तो फीस और डोनेशन तो अधिक होगा ही ।
अक्सर कर इन विद्यालयों की शिकायतें कोई ना कोई अभिभावक कहीं ना कहीं कर देते हैं पर कार्यवाही के नाम पर कुछ नही होता ।
कारण हम और आप सभी जानते हैं पैसा ऊपर तक जाता है सभी लोग लेते हैं।
पर अभी तो देश के हालात कोविड-19 कोरोना वायरस की वजह से अति संवेदनशील बने हुए हैं जब कि प्रधानमंत्री मोदी का सख्त आदेश है स्कूल बंद रहेंगे फीस किसी अभिभावक से नहीं ली जाएगी और लॉक डाउन का पूरा पालन किया जाएगा।
पर शहर के ओधोगिक टयूलिप स्कूल की हिम्मत देखिए। जब ऑन लाइन बच्चों को पढ़ाई कराने वाले टीचरों ने अपनी वेतन की मांग की तो स्कूल प्रबंधन ने उल्टे टीचरों से कह दिया कि वह बच्चों के अभिभावकों और बच्चों से कहें कि वह विद्यालय में अपनी फीस जमा करें।
यही नही जब स्कूल पूरी तरह बंद है तो रिजल्ट देने के बहाने अभिभावकों को स्कूल में बुलाया जा रहा है,
पर रिजल्ट देना तो एक बहाना है दरअसल अभिभावकों से फीस के बाबत विद्यालय प्रबंधन को बात करनी है और फीस लेनी है
इन हालातों में इतनी बड़ी हिम्मत और हिमाकत एबं सभी नियमों को धता बताकर स्कूल का खोलना बच्चों से फीस लेना इस बात का सीधा-सीधा संकेत करता है कि विद्यालय प्रबंधन पूरी तरह से भ्रष्ट है और उच्चाधिकारियों को इन्हें संरक्षण प्राप्त है।
इन विद्यालयों के अंदर मानवता मर चुकी है ।क्युकि जेहन मे देश हित नही है, पैसा…
ऐसे संवेदनशील समय में स्कूल के टीचरों और अभिभावकों को विद्यालय में बुलाना मतलब राष्ट्रद्रोह होना प्रतितमालुम होता है,
कार्रवाई करना,ना करना प्रशासन का काम है हमारा काम है लिखना और आम जनमानस की परेशानी आम जनमानस और अधिकारियों तक पहुंचाना।
अब देखते हैं कि पैसा उपर है कि जनता.शिक्षा के नाम पर उगाही जिन्दगियो से खिलवाड़..