सेहत बनानी है तो उपयोग में ले पनचक्की से पीसा गया आटा
आज भी अंग्रेजो के समय से चलती आ रही है यह आटा चक्की
सेहत से जुड़े हुए कुछ खास राज आज भी जिंदा मिसाल के रूप में सावित हो रहे है इससे

बुलंदशहर । सेहत से जुड़े कुछ राज आपको बुलंदशहर की एक आटा पनचक्की से जुड़े हुए है जिनको देवकेसरी समाचार पत्र के माध्यम से आप तक पहुचाए जा रहा है । इसी के चलते एक बहुत पुरानी मिसाल से भी जुड़ा हुआ है सेहत का राज ।
किस प्रकार तनाव भरे जीवन मे हम अपने स्वास्थ्य को कमजोर करते जा रहे है । इस राज की कुछ सच्चाई आपके सामने खोली जा रही है ।
पुराने समय मे अधिकतर सभी घरों में गेहूं का आटा पीसने के लिए घर मे ही हाथ से चलने वाली चक्की लगाई जाती थी । जिसका सबसे बड़ा फायदा घर की महिलाओं को चक्की चलाते समय का मानो आज के युग का जिम । यही नही हाथ की चाकी से पीसने वाला आटा धीरे धीरे पिस्ता था और ठंडा होता था । जिसके कारण आटे में रहने वाले जरूरी पोषक तत्व जीवित रहते थे और रोटी भी काफी सफेद और मुलायम हुआ करती थी । जिसके कारण परिवार के अधिकतर लोगों के शरीर मे ताकत बरकरार बनी रहती थी ।
आज के समय मे बिजली और इंजन से आटा चक्कियों को चलाया जाता है ओर इनकी रफ्तार काफी अधिक होती है । पिसा हुआ ताज़ा आटा इतना गर्म हो जाता है कि गर्म पीसने के कारण जरूरी पोषक तत्व उसी समय खत्म हो जाते है और रोटी के रंग में भी फर्क देखने को मिलेगा यही नही रोटी भी ठंडी होने के बाद टाईट हो जाती है और शरीर को मिलने वाली ताकद तो मानो खत्म हो गई हो केवल पेट भरने के प्रयास को ही हम कर पाते है ।
अंग्रेजो के समय में लगभग देश की आज़ादी से कई वर्ष पहले से बुलंदशहर के वलीपुरा नहर के निकट आज भी पिस्ता है पनचक्की से आटा इस आटे की ख़ास बात यह है कि इससे गेंहू आदि की पिसाई धीरे धीरे होने के कारण आटा ठंडा पिस्ता है ।जिससे जरूरी सभी पोषक तत्व जीवित रहते है और आटा जल्द खराब भी नही होता है । रोटी सफेद आएगी और मुलायम भी रहेगी । जिसकी ताकद बिजली से पीसने वाले आटे से मान सकते है कई गुना अधिक होती है । क्योकि जीवित रहने के लिए रोटी खाना बहुत जरूर ही नही आवश्यकता भी है । सेहत बनानी है तो पनचक्की के आटे का करे उपयोग। किन्तु इसकी आवश्यकता इतनी है कि इस पनचक्की पर लगभग 6 चक्की बहुत पहले की ही लगी हुई है । जो दिन रात चलती रहती है केवल नहर का पानी न मिल पाने के समय ही इस चक्की को बन्द देखा जा सकता है ।