अमरोहा। शहर की दुकानें बंद होने से अब गांव की दुकानदारी भी मंदी पडऩे लगी है। दुकानों पर किराना का सामान खत्म हो रहा है। दिहाड़ी आमदनी बंद होने से श्रमिक वर्ग का बजट भी गड़बड़ा रहा है। अब गेहूं की कटाई की है, लेकिन ताजा आमदनी बंद है।
लॉकडाउन के बाद शहर में किराना के थोक विक्रेताओं के शटर बंद हैं। ऐसे में गांव के दुकानदारों का संपर्क उनसे पूरी तरह से टूट चुका है। गांवों के किराना दुकानदार जितना स्टाक था उसे एक महीने में बेच चुके हैं। घरों में प्रयोग होने वाले दैनिक सामान की कमी भी बनने लगी है। साबुन, चीनी, दाल, शेम्पू, बिस्कुट समेत अन्य सभी सामान खत्म हो रहा है। नतीजतन दुकानदार, दुकानें बंद करने के लिए मजबूर हैं।
गांव असगरीपुर निवासी दुकानदार हाजी हारून बताते हैं दुकान में सामान खत्म हो रहा है। थोक की दुकानें बंद हैं। सेल्समैन भी नहीं आ रहे। ऐसे में दुकान बंद कर दी है। गांव हुसैनपुरा निवासी चंद्रप्रकाश बताते हैं कि गांव में दूध, सब्जी, आटा-चावल मिल जाता है परंतु अन्य सामान नहीं मिलता। ऐसे में दिक्कतें आ रही हैं। मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है। आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
लॉकडाउन के चलते शहरों में थोक विक्रेता दुकान नहीं खोल रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों पर भी सामान नहीं पहुंच रहा। जो स्टाक था, अब तक बिक चुका है। सामान खत्म होने के कारण दुकान बंद कर दी है। ग्रामीणों के सामने दिक्कत आ रही है।
हाजी हारून, दुकानदार।
दिहाड़ी मजदूरी करते थे लेकिन, अब वह भी खत्म हो गई। अच्छी बात यह है कि गांव में रहते हैं। यहां राशन सब्जी मिल जाती है। ताजा आमदनी तो रही नहीं। जमा पूंजी भी खत्म हो रही है। बैंक का ढाई लाख रुपये का कर्ज है। उसकी किस्त कैसे जाएगी, अब इसकी ङ्क्षचता सता रही है।