एटा,कोरोना की तबाहियों की चीखें अभी आवाम के बीच मे जिंदा है,कि दूसरी मौत डेंगू की तूफानी आहट की दहशत लेकर आ गई—

एटा,कोरोना की तबाहियों की चीखें अभी आवाम के बीच मे जिंदा है,कि दूसरी मौत डेंगू की तूफानी आहट की दहशत लेकर आ गई
एटा,आसपास, अबतक कोरोना का प्रकोप पब्लिक के बीच से हटा नहीं कि, दूसरा डेंगू, शहर,गांव डेंगू की ग्रफ्ति मे जकड़ता जा रहा है,आएदिन मौतें होने लगी है,लेकिन बेखबर प्रशासन, और नगर पालिका मे इसको रोकने की हलचल नहीं हो रही है,हर घर के सामने सीवर लाइन की खुदाई से गंदगी के कारण सफाई ब्यबस्था बाधित हो रही है,गंदगी के साथ पानी भी घरों के सामने भरा हुआ है,जिसमे मच्छर बैठने का स्थान बना हुआ है,कुछ लोगों ने बर्षों से मकान बनाने का कार्य शुरु किया है,पूरी सड़कों पर मेटेरियल फैलाकर गंदगी की हुई है जो कार्य छ महीने मे हो सकता था,वह बर्षों से चल रहा के वाबजूद भी आगे बढऩे की बजाय पीछे खिसकता जा रहा है इंसानों के निकलने की जगह तक बाधित हो रही है,लेकिन शासन, नगरपालिका कभी इन चीजों पर ध्यान नहीं देते है, तब कहना होगा कि लापरवाहियों का असर आखिर भोगती तो पब्लिक ही है,फिर चाहे कोरोना, हो या डेंगू, मलेरिया, सवाल तो बहुत है,आपके कार्य प्रणाली के लेकिन हमेशा दम तोड़ते पब्लिक की तबाहियों मे ही रद्दी हो जाते है,क्यों कि पब्लिक की आवाज तब दब जाती है जब रक्षा, सुरक्षा,और कार्यकर्ता,मौसेरे रिस्ते बन जाते है,तब जनहित खत्म हो ही जाता है,और शुरू होजाता है,खुदहित,जो पब्लिक अपने बलिदान देती रहती है,अपने अमूल्य अधिकारों से लेकर जिंदगी तक देकर। सर्मनाक है,ये सब कार्यप्रणाली।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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