लखनऊ की जिला जेल समेत सूबे की 25 संवेदनशील जेलों के बंदीरक्षक बॉडी वार्न कैमरे पहन कर ड्यूटी करेंगे। डीजी आनन्द कुमार की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने इन जेलों में बॉडी वार्न कैमरे (बीडब्लूसी) लगाने की मंजूरी दे दी है। इसमें विजुअल के साथ आवाज भी रिकार्ड होगी, जिसकी रिकॉर्डिंग कंट्रोल रूम से होगी। एक सप्ताह पहले केंद्र सरकार ने यूपी समेत राजस्थान, तेलंगाना और पंजाब की जेलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत बॉडी वॉर्न कैमरे लगाने की अनुमति दी थी। यूपी को इसके लिए 80 लाख रुपये मिलेंगे। डीजी बताते हैं कि 25 जेलों में कैमरे लगने के बाद यदि रुपये बचते हैं तो फिर दूसरे चरण में शेष जेलों में कैमरे लगाए जाएंगे। कमेटी में अपर महानिरीक्षक डॉ. शरद के अलावा शोध अधिकारी केबी जोशी समेत डीआईजी और वरिष्ठ अधीक्षक शामिल हैं।
बन्दियों की मनोदशा में सुधार होगा
डीजी आनन्द कुमार बताते हैं कि कमरे में कैद बन्दियों की मनोस्थिति और अवसाद के साथ ही उनके रचनात्मक कामों को समझने में मदद मिलेगी। मनोवैज्ञानिकों, मनोचिकित्सकों, विधि- फॉरेंसिक विशेषज्ञ की मदद से बन्दियों की मनोदशा का विश्लेषण और परीक्षण कराया जाएगा। बन्दियों के व्यवहार का अध्ययन करके सुझाये गए उपायों की मदद से आपराधिक प्रवृत्ति को दूर करने में सहायता करेंगे। वीडियो बन्दियों के परिजनों को भी दिखाए जाएंगे ताकि वह उन्हें भी समझा सकें।
इन जेलो में लगेंगे कैमरे
लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, बरेली, प्रयागराज, मुरादाबाद, सुल्तानपुर, आगरा, अलीगढ़, आजमगढ़, प्रतापगढ़, नोयडा, गाजियाबाद, फतेहगढ़, इटावा, सीतापुर, बागपत, मथुरा समेत 25 जेलें हैं। इन जेलों में पहले चरण में बॉडी वार्न कैमरे लगेंगे।