शहर को बहरा बना रहा गाडि़यों का प्रेशर हॉर्न

शहर में बेहिसाब गाडि़यों की वजह से कई इलाकों में सामान्य से कई गुना ज्यादा है साउंड पॉल्यूशन
पॉल्यूशन कंट्रोल डिपार्ट में वाहनों पर नहीं करती है कोई कार्रवाई
चित्रकूट सिटी में जिस रफ्तार से वाहनों की संख्या बढ़ी है, उससे कहीं ज्यादा गति से साउंड और एयर पॉल्यूशन बढ़ा है। गाडि़यों में बेरोक-टोक बजते प्रेशर हॉर्न, कान फाड़ने वाली म्यूजिक बजना और तेग गति से गाड़ी ड्राइव करने से कई इलाके में सामान्य से कई गुना साउंड पॉल्यूशन बढ़ गया है। जिससे जहां साउंड पॉल्यूशन का लेवल 50 डिसीबल होना चाहिए, वहीं यहां यह 68 डिसीबल से ज्यादा है। यहां सबसे ज्यादा साउंड पॉल्यूशन बस स्टैंड, शंकर बाजार,और पटेल चौक इलाके में है। इसके अलावा बेडीपुलिया के पास भी सामान्य डिसीबल से काफी ज्यादा साउंड पॉल्यूशन पाया गया। वाहनों में प्रेशर हॉर्न और बिना जांच किए वाहनों को परमिट दे देना साउंड पॉल्यूशन की बड़ी वजह है।
साउंड पॉल्यूशन लेवल की जांच नहीं
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सामान्य दिनों मे ध्वनि प्रदूषण की जांच की व्यवस्था नही है। चित्रकूट मे प्रदूषण बोर्ड की ओर से कभी जांच ही नही की जाती ,आखिर क्यों….?
ट्राफिक व परिवहन विभाग भी इस मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करती है। ऐसे में बढ़ रहे साउंड पॉल्यूशन का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
साउंड पॉल्यूशन से इन बीमारियों का खतरा
हार्ट डिजीज की आशंका
60 डिसेबल से अधिक तीव्रता की ध्वनि के बीच 8 से 10 घंटा रहने की स्थिति में थकान, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और सिर दर्द होना स्वाभाविक है। जिन लोगों की उम्र 40 पार हो चुकी है, अगर वे लगातार शोरगुल वालों के बीच रहते हैं तो उनमें हाई बीपी, हृदय रोग, स्थाई बहरापन और स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है।
कम हो जाती है सुनने की क्षमता
साउंड पॉल्यूशन का बुरा प्रभाव सुनने की क्षमता पर भी पड़ता है। लगातार शोरगुल के बीच रहने से ऊंचा सुनने की शिकायत हो जाती है। तेज आवाज सिर्फ कान के पर्दे को ही प्रभावित नहीं करता है बल्कि मानसिक संतुलन को भी बिगाड़ देता है।
बहरा कर सकता है 90 डिसीबल साउंड
डॉक्टरों के अनुसार 90 डेसिबल और उससे अधिक आवाज सीधे कान मे जाने से इसके पर्दे को नुकसान पहुंचाता है। दूसरी ओर 110 डेसिबल या उससे ज्यादा आवाज होने पर कान की नस उसके पर्दे को नुकसान हो सकता है।
साउंड पॉल्यूशन हेल्थ के लिए काफी खतरनाक है। इससे हाई बीपी, हार्ट डिजीज, चिड़चिड़ापन, सिर दर्द के अलावा ऊंचा सुनने की शिकायत हो जाती है। इस वजह से मानसिक संतुलन भी बिगड़ता है।
अब सोचने वाली बात यह है कि ट्रको में लगे हाई प्रेसर हॉर्न पर कार्यवाही आखिर क्यों नही की जा रही…?
आखिर क्यों नही ट्राफिक विभाग,परिवहन विभाग,पॉल्यूशन कंट्रोल विभाग इन रोक लगाने में नाकाम हो रहा है..?