आज़ान की आवाज सुनकर रखते ओर खोलते हैं रोज़ा इसलिए आज़ान की आवाज़ हर नागरिक तक पहोचना जरूरी।
पुलिस द्वारा मस्जिदों में माईक पर आज़ान देने पर रोक की मिल रही खबरों पर खास खबर।
नई दिल्ली: जरूरी जानकारी अज़ान का मतलब लोगों को उस वक़त की नमाज़ पढ़ने की इतला देना होता है। न की मस्जिदों में बुलावा देना।
कुछ जगह पुलिस ने माइक पर आज़ान देने के लिए मना किया था। पर आज़ान की आवाज़ सुनकर लोगों को याद आजाता है इस वक़्त की नमाज़ पढ़ने का वक़्त हो गया है सिर्फ ये होती है आज़ान की वजह।
जैसे कल से रोज़े शुरू हैं और रोज़ों में सुबह फ़ज़र की आज़ान से पता चलता है सेहरी (यानी खाने का वक़्त खत्म) होगया ऐसे ही शाम की मग़रिब की आज़ान की आवाज सुनकर रोज़ा इफ़्तार होता है इस लिए आज़ान होने की बात उठी है । उससे मस्जिदों में नमाज़ के लिए कोई मतलब नही है।
सभी पत्रकारों और अपने पुलिस अधिकारियों को ये जानकारी पोहचना जरूरी है।
प्रशासन धियान दें अगर रोज़ा रखने के वक़्त आज़ान की आवाज़ नही पोहची ओर कोई व्यक्ति एक मिनट बाद खाना पानी की बूंद का भी इस्तेमाल करता रहा उसका रोज़ा नही होता ऐसे ही शाम की मग़रिब की आज़ान आज़ान की आवाज़ से पहले कुछ ख़ालिया तो रोज़ा टूट जाता है या आज़ान का वक़्त निकल गया और उसे आवाज़ नही आई तो भी रोज़ा ख़राब होजाता है इस लिए भारत सरकार व दिल्ली सरकार सभी मस्जिदों में लोकडॉउन तक आज़ान देने की खासियत समझे और इस अच्छे काम मे सहयोग दे जो बहुत जरूरी है।