
मध्यप्रदेश की सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा –
श्रीकृष्ण कभी माखन चोर नहीं थे!
उनके घर हजारों गायें थीं, दूध-घी-माखन की कभी कोई कमी नहीं थी। ऐसे में चोरी का सवाल ही नहीं उठता।
दरअसल, “माखन चोरी” कोई साधारण प्रसंग नहीं था, बल्कि यह कंस के अत्याचार और अन्याय के खिलाफ प्रतीकात्मक विद्रोह था।
लेकिन समय के साथ इस शब्द को गलत रूप में प्रस्तुत किया गया।
अब सरकार ने ठान लिया है कि श्रीकृष्ण की लीला को सही संदर्भ में समाज के सामने रखा जाएगा।
संस्कृति विभाग जल्द ही जागरूकता अभियान चलाएगा।
कथावाचकों और धर्मगुरुओं से अपील होगी कि इस शब्द का उपयोग न करें।
खुद मुख्यमंत्री विभिन्न मंचों पर इस सच्चाई को उजागर करेंगे।
उद्देश्य साफ है –
भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र को सही स्वरूप और वास्तविक महिमा के साथ प्रस्तुत करना।