
यू-पी-एटा-
क्या मकानों के इतने नजदीक बिजली के लट्ठे लगाए जा सकते हैं–
क्या जिम्मेदारों को इसकी परवाह है कि जरा सी चूक और एक बड़ा हादसा–
क्या समय-समय पर इनकी देखभाल नहीं करनी चाहिए नहीं–
क्या इसके आसपास के होते रोजगार पर कभी ध्यान दिया गया–
कि एक जरा सी चिंगारी पूरी कालोनी को स्वाह करने के लिए काफी है–
एक तो लट्ठे का स्थान खतरे से खाली नहीं ऊपर से क्या कभी चेकिंग नहीं करनी चाहिए मकानों से सटे बिजली के लट्ठे और ओवरलोड तारों पर झूलते बंदर सीन देखकर अंधे भी अंदाजा लगा सकते हैं कि जरा सी स्पार्किंग की चिंगारी क्या एक अकेला घर फूंकेगी या पूरी कालोनी और आस पास बारूद के ढेर पर सिर्फ एक ही घर नहीं खड़ा है इन झूलते ओवरलोड तारों से निकली एक चिंगारी– सिस्टम जब तक संभलेगा तब तक यहां बारूद का –क्या घरों के इतने नजदीक बिजली के लट्ठे होने चाहिए नेटवर्क से लेकर कितने घरों का लोड इस एक लट्ठे पर तस्वीर पर गौर कीजिएगा कि बचने के नाम पर सिर्फ यहां ओप्शन मात्र एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई क्या व्यवस्थाएं हैं पब्लिक की सुरक्षा हेतु यह देखकर बोलने की क्या आवश्यकता है अंधे भी देख सकते हैं मगर नहीं पर क्यों, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है बिजली विभाग और अन्य जिम्मेदारों को बस इतना ही सूचित करना और दिखाना है कि यहां अगर किसी भी तरह की कोई भी घटना होती है उसकी भरपाई की जिम्मेदारी आप सभी की जिम्मेदारों की होगी है।
लेखिका पत्रकार दीप्ति चौहान।✍️