शोध छात्रों को होना चाहिए जिज्ञासु, जिज्ञासा से ही शोध का होता है आरम्भ- प्रो. सालेहा रसीद

, पूर्व विभागाध्यक्ष उर्दू फारसी विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय

प्रयागराज। मंगलवार को ‘अभिलेख/पाण्डुलिपि अभिरूचि विषयक छह दिवसीय कार्यशाला‘ कार्यकम आयोजन के दूसरे दिन क्षेत्रीय अभिलेखागार(संस्कृति विभाग), प्रयागराज द्वारा कार्यालय परिसर में कार्यशाला कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यशाला का आयोजन दो सत्रों में किया गया। प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. सालेहा रसीद, पूर्व विभागाध्यक्ष उर्दू फारसी विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा कार्यक्रम की शुरूआत की गई। उन्होंने बताया कि हमें अभिलेख एवम् पांडुलिपि का अध्ययन कर शोध कार्य करना चाहिए। शोध छात्रों को जिज्ञासु होना चाहिए। हर समय विद्यार्थियों को जिज्ञाषा करते चाहिए क्योंकि जिज्ञासा से ही शोध का आरम्भ होता है। राकेश कुमार वर्मा द्वारा अभिलेख संरक्षण की प्राचीन पद्धति व शैलेन्द्र यादव द्वारा नवीन पद्धति की जानकारी प्रदान की गई। द्वितीय सत्र में प्रो. अनिल प्रताप गिरी, संस्कृत विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने बताया कि पांडुलिपियां ही हमारी वास्तविक विरासत हैं। सरकार को पांडुलिपियों के संरक्षण,संवर्धन,प्रकाशन के लिए कार्य करना चाहिए। पांडुलिपियां ही शोध के लिए प्राथमिक स्रोत हैं। उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार, लखनऊ द्वारा ‘अभिलेख/पाण्डुलिपि अभिरूचि विषयक कार्यशाला का आयोजन लखनऊ एवं प्रयागराज जनपद में किया जा रहा है। कार्यशाला में लगभग 60 से अधिक विभिन्न विश्व विद्यालयों के छात्र/छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का संचालन हरिश्चंद्र दुबे द्वारा किया गया। सभी अतिथियों का स्वागत गुलाम सरवर पांडुलिपि अधिकारी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर बाबूलाल भंवरा पूर्व राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, वेदानंद विश्वकर्मा, रोशन लाल, शुभम कुमार सहित विभिन्न विश्व विद्यालयों के छात्र छात्राओं की उपस्थिति रही।
राम आसरे

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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