
रानी अवंतीवाई मेडिकल कॉलेज बना लूट का अड्डा टेस्ट के नाम पर भी हो रही है अवैध वसूली
नहीं बैठते समय से चिकित्सक भारी भीड़ के चलते नहीं मिल पाता पीड़ितों को उचित उपचार चिकित्सकों द्वारा मरीज को घर पर आने हेतु किया जाता है मजबूर आए दिन होता रहता है मेडिकल कॉलेज में विवाद लेकिन नहीं हो पाती किसी दोषी के विरुद्ध कार्रवाई ।
एटा 2 जून। रानी अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर और मुफ्त चिकित्सा का दावा चिकित्सकों की लापरवाह कार्यप्रणाली और अवैध वसूली के चलते आम जन मानस हेतु एक दिव्य सपना साबित हो रहा है ।
एक और भारत में जहां कोरोनावायरस जैसी घातक बीमारी पुनः पांव पसार कर सैकड़ो लोगो को मौत के मुंह में घकेल चुकी है और उसे लेकर आम जनमानस और सरकार भारी चितत है वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन जानबूझकर भारी भीड़ एकत्रित कर लोगों को मोत के मुंह में घकेलने से बाज नहीं आ रहा है ।
दूर दराज ग्रामीण अंचलों से शासन की लंबी-लंबी निशुल्क स्वास्थ्य व्यवस्था की घोषणाओं को सुनकर उपचार की आशा लेकर आए मरीजों को जहां लंबी-लंबी कतारों में लगकर उपचार हेतु ठोकरें खानी पड़ती है वहीं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जो स्वयं
अलीगढ़ में एक निजी चिकित्सालय का संचालन करते हैं और प्राचार्या की लापरवाह कार्य प्रणाली के चलते चिकित्सकों के समय से अपने कमरों में बैठकर मरीजों को ना देखने के कारण भारी भीड़ एकत्रित हो जाने एवं चिकित्सकों के मरीजों को सही प्रकार से न देखकर रामवाण दवाई लिखकर जो किसी भी तरह के मरीजों पर काम करती हैं भगा दिया जाता है। और मरीज के फायदा न होने की बात कहने पर उन्हें अपने निजी चिकित्सालय अथवा घरों पर आने हेतु मजबूर किया जाता हे ।
इन सबके पीछे मोटी रकम वसूली के वाद स्थानीय लोगों की नियुक्ति किया जाना है यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज मरीजो के उपचार से अधिक मरीज उनके साथ आए सहयोगियों एवं पत्रकारों से मारपीट धरना प्रदर्शन आदि को लेकर चर्चा में रहता है और जिला प्रशासन को आएदिन हस्तछेप करना पड़ता है लेकिन आश्चर्य का विषय है कि मरीजो के खुलेआम हो रहे उत्पीड़न की शासन प्रशाशन को पूर्ण जानकारी होने के बाद भी किसी भी जिम्मेदार अधिकारी चिकित्सक आदि के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती जिससे उनकी हठधर्मिता वठती ही जा रही है जिस कारण आएदिन मेडिकल कॉलेज में मारपीट जैसी घटनाएं घटित होती रहती है।
मेडिकल कॉलेज में नियुक्त अधिकतर स्टाफ को स्थानीय नेताओं का संरक्षण प्राप्त है जिससे वह मरीज एवं उनके साथ आए तीमारदारो के साथ मारपीट और अभद्रता करने से नहीं चूकते और राजनीतिक संरक्षण एवं मेडिकल कॉलेज की प्राचार्यो के दबाव के कारण पुलिस द्वारा किसी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा पाती इतना नहीं पूर्व में उक्त मेडिकल कॉलेज में नियुक्त एक पुलिस कर्मी के साथ भी चिकित्साकर्मियों द्वारा मारपीट कर अभद्रता की गई थी दोषियों का विरुद्ध किसी कार्रवाई के स्थान पर उक्त पुलिसकर्मी का स्थानांनतरण कर दिया गया था।
मेडिकल कॉलेज में होने वाले किसी भी प्रकार के ऑपरेशन को निशुल्क कराया जाना संभव नहीं है क्योंकि चिकित्सकों द्वारा खुलेआम कहा जाता है कि अन्य किसी स्थान पर ले जाकर इलाज कराए जाने में तुम्हारे लाखों रुपए खर्च होंगे हम तो केवल दस वींस पचास हजार रुपए ही मांग रहे हैं ऐसा नहीं है कि इस अवैध वसूली की जानकारी मुख्य चिकित्साधीक्षक अथवा प्राचार्य को ना हो क्योंकि उक्त संदर्भ में शिकायत करने के बावजूद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता बल्कि उल्टे मरीज को मेडिकल कालेज से छुट्टी करके अन्य स्थान हेतु रेफर कर दिया जाता है और जबरन बाहर निकाल दिया जाता है ।
बसूली करने वाले चिकित्सकों एवं कर्मचारियों का खुलेआम कहना होता है जिससे चाहो शिकायत कर लो हम ऊपर तक हिस्सा देते हैं हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे ।
ऐसी स्थिति में सफेद हाथी बने मेडिकल कॉलेज में मरीजों को निशुल्क चिकित्सा उपचार मिलना असंभव सा प्रतीत हो रहा है यदि समय रहते शासन द्वारा उच्च स्तरीय जांच करा स्थानीय स्तर पर मेडिकल कॉलेज में हो रही लूट खसूट एवं मरीजों के उत्पीड़न को नहीं रोका गया तो शायद इसके परिणाम आगामी चुनाव में भी सामने आ सकते हैं ।
और मुख्यमंत्री का भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा एटा मेडिकल कॉलेज में खोखला नजर आ रहा है।