
निर्भीकता से कोई समझौता नहीं
मैहर में आम आदमी पार्टी की 21 सूत्रीय मांगों को लेकर आप ज़िला अध्यक्ष का आमरण अनशन 48 घंटे पार कर चुका है, लेकिन प्रशासन अब तक मौन साधे बैठा है। आंदोलन का केंद्र बना मैहर, प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुका है। आम आदमी पार्टी के ज़िला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह का स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है, वे अब बोलने में भी असमर्थ हो रहे हैं। SDM कार्यालय से महज 50 मीटर और कलेक्टर कार्यालय से 2 किलोमीटर की दूरी पर चल रहा यह अनशन अब जनक्रांति का रूप लेता दिख रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही इस खबर से जनता में उबाल है, लोग समर्थन में अनशन स्थल पहुंच रहे हैं। सवाल ये है कि क्या प्रशासन सिर्फ़ सत्ता के इशारों पर चलेगा या जनता की पीड़ा सुनेगा? मूल सवाल प्रशासन से यह है — क्या 21 जनहित की मांगें कोई मज़ाक हैं? क्या ज़िला कलेक्टर कार्यलय केंद्र में बनाने की माँग, अस्पताल, स्कूल, सड़क, मिड-डे मील, आदिवासी अधिकार, प्रदूषण नियंत्रण, घोटालों की जांच जैसी बातें प्रशासन के लिए गैरज़रूरी हैं?
क्यों अब तक कोई अधिकारी अनशन स्थल तक नहीं पहुंचा?
प्रशासन और सत्ताधारी दल की चुप्पी अब सवाल बन चुकी है —
“जनता की आवाज अनशन पर, प्रशासन मौन क्यों?”
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन की नींद खुलेगी या फिर जनता के आक्रोश की लहरें ही उसे जगा पाएगी!