
सिंदरी शहरपुरा युथ क्लब स्थित मीरा मोहन धाम में नव निर्मित श्री राधा कृष्ण मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ भव्य श्री मद्भागवत कथा का चल रहा है कार्यक्रम।
सिंदरी, धनबाद।
सिंदरी शहरपुरा युथ क्लब स्थित मीरा मोहन धाम में नव निर्मित श्री राधा कृष्ण मंदिर में श्री राधा कृष्ण की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के साथ साथ श्री श्री 108 श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के प्रथम दिन 2 मई से प्रारंभ
श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन मध्य प्रदेश से आई आस्था भजन एवं सत्संग चैनल की प्रखर प्रवक्ता पूज्य डॉक्टर अमृता कर्णेश्वरी जी ने भक्तों को भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्ण के प्रगट होने के बाद कंस उनको मारने के लिए अपनी राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षस पूतना को भेजता है। पूतना वेष बदलकर भगवान श्री कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है। लेकिन भगवान श्री कृष्ण उसका उद्धार कर देते हैं । उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इन्द्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने के की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण द्वारा उनको भगवान इन्द्र की पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं। इन्द्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं। जिसको देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देख भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्काअंगुली के नख पर उठाकर पूरे ग्राम वासियों को पर्वत के नीचे बुला लेते हैं। इससे इंद्र अपनी गलती स्वीकार करके भगवान की शरणागति में आ जाता है और भगवान से क्षमा याचना करता है। जिसके बाद ब्रज में भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारा लगाने लगते हैं। सुरभि गाय को बुलाकर भगवान का दुग्ध अभिषेक कराया जाता है, गोवर्धन की लीला में देवी जी ने संदेश दिया कि वृक्षों को काटने से रोकना चाहिए, क्योंकि प्रकृति यदि असंतुलित होती है तो उसका प्रभाव सभी जनमानस पर होता है। साथ ही जिन गौ माता की सेवा भगवान ने गोविंद के रूप में की उन गौ माता की हमें रक्षा करनी चाहिए। मौके पर भगवान को छप्पन भोग लगाया गया। उक्त भव्य कार्यक्रम एवं सात दिनों तक चलने वाले यज्ञ के आयोजक गौरव वक्ष उर्फ लक्की सिंह एवं संस्थापक मोहन सिंह ने समस्त क्षेत्रवासियों भक्तजनों एवं श्रद्धालुओं से निवेदन करते हुए कहा कि लोग इस भव्य दिव्य कथा में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करें और सत्संग, कथा व भक्ति के माध्यम से अपने जीवन को पुण्यमय बनाएं। पांच दिनों से चल रहे भव्य कार्यक्रम से पूरा सिंदरी भक्तिमय वातावरण में डुबा हुआ है।