शहर को सजाने और उजाड़ने का मैन कार्य नगर पालिका परिषद का होता है–स्वक्षता से लेकर गलियों की सड़कों तक लेकिन क्या कहा जाए कि कालोनियों की सफाई तो छोड़िए लोगों ने अपने अपने दरवाजों पर सड़के जो बना रखी है उठने बैठने धूल मिट्टी से बचने के लिए इंसानों के रहने लायक उसको भी एटा की प्रोग्रेस ने खोद खोदकर धूल मिट्टी गंदगी से पाट रखा है सालों से गड्ढे खोदकर डाल रखे हैं कहीं सीवर लाइन तो कहीं गैस लाइन लेकिन एक भी लायन अभी तक कंप्लीट नहीं हुई और गंदगी लोगों के दरवाजों पर वर्षों से खोद खोद कर डाल रखी है नालियां गंदगी से बजबजा रही है सड़कों पर झाड़ू का कोई रूटीन नहीं कर्मचारियों से किसी काम के लिए अगर कोई कहता भी है तो यह लगते ही नहीं है कि कर्मचारियों भाषा है खुद को चेयरमैन समझते हैं जबाव भी और काम भी नहीं एसी स्थिति शायद पहले कभी नहीं हुई थी राजनीति ब्यबहार नहीं है जनहित की सेवा का निष्पक्ष कार्य होता है लेकिन आजकल पांच साला चमक वोट का सोशण जरूर करती है राजनीति छोटी हो या बड़ी जनहित के लिए व्यवहारिक होना बहुत जरूरी है नाकामियों के लिए बिल्कुल नहीं अपने अपने मतलब और कार्य होते हैं वोट का अधिकार और सम्मान दोनों राजनीति के पास सुरक्षित रहने चाहिए हर कार्य की एक समय सीमा होती है पांच साल का कार्य काल अगर घोषणाओं में निकल जाता है तो उसे असफल राजनीति के दायरे में ले आता है इस शहर में जितने वरिष्ठ नेता हैं उस हिसाब से इसकी प्रोग्रेस सवाल करती है लिमिट और कार्यप्रणाली दोनों पर क्या है इस जिला में एसा जैसी प्रोग्रेस हुई है आज फिर चाहे सड़कों का जाम हो या मैन सड़कों और कालोनियों की सड़कें बच्चों की छुट्टियां होने से पहले बच्चे अपना घर छोड़ने को कहने लगते हैं क्यों, क्यों कि बच्चे हो या बड़े कुछ समय और पल उन्हें भी इंसानों के लायक चाहिए तब है क्या एटा शहर के नाम पर जो था बो भी खत्म कभी एक चिड़ियाघर हुआ करता था एक हिरण और मगरमच्छ बतखें देखने बच्चे जाया करते थे वहां पर एक वीरांगना की मूर्ति भी स्थापित थी वहां आज भैंसों का तबेला दिखाई देता तीन तीन सिनेमाघर सुना जाता बो भी तराजू के बटवारे में खत्म हो गये शायद उनमें से एक पुनः फिर तैयार हो रहा पार्कों में पेड़ों की छाया में आराम से शराबी शराब और जुआरियों का अड्डा इंसान तो पलायन करेगें ही आखिर इतनी वैज्ञानिक प्रोग्रेस का क्या फायदा यहां तो ये प्रोग्रेस तब आ पाएगी जब हर इंसान के पंख उगने लगेंगे- दीप्ति

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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