पढ़ने से पहले…. खुद के लिए बने क़ानून को समझ लीजिये

सौमित्र सेन भारत के पहले हाई कोर्ट(कोलकाता )जज थे जिनको भ्रष्टाचार के केस में गिल्टी पाया गया , इंपीचमेंट होने से पहले इस्तीफा दे दिया मस्त पेंशन लें रहे

PD दिनकरन दूसरे जज थे बस सुप्रीम कोर्ट जज बनने ही वाले थे कि बार काउंसिल और तमाम हस्तियों ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए , दिनकरन साहब भी इस्तीफा देकर इंपीच होने से बच गए और मस्त पेंशन लें रहे ।आनंदित होकर विदेश घूम रहें है।

दोनों जज इंपीच होने से पहले इस्तीफा देकर पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट ले रहे ,क्योंकि कोई भी संवैधानिक नियम और कोई भी कानून नहीं है ,जो चोर लॉर्डशिपों के पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट्स रोक सके ।

कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन देश के इतिहास में दूसरे ऐसे जज हैं, जिन्हें अनाचार के आरोप में महाभियोग की कार्यवाही का सामना करना पड़ा था। 53 साल के सेन ने महाभियोग चलाए जाने के बाद अपना इस्तीफा उस समय की राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल को भेजा था।

अब समय आ चूका है कानून बनना चाहिए क्योंकि इधर जानवर से लेकर कीड़े तक के लिए कानून है. लेकिन कोई बताएगा कि ये lordship किस लिंगजीव हैPs

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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