“मऊगंज में पत्रकारों पर नेतागिरी: भ्रष्टाचार उजागर करने पर प्रशासनिक दबाव”

मऊगंज जिले में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पत्रकारों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह ने आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार का खुलासा किया। इसके बाद अधिकारियों की बौखलाहट इतनी बढ़ गई कि उन्हें जनसंपर्क के आधिकारिक ग्रुप से हटा दिया गया!पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह को ग्रुप से हटाए जाने के पीछे किसका आदेश था, यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या पंकज श्रीवास्तव ने ग्रुप से हटाने का निर्देश दिया, या कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने खुद ऐसा करने के आदेश दिए। पत्रकारों का आरोप है कि प्रशासन भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को निशाना बना रहा है। रुद्र प्रताप सिंह द्वारा शराब माफिया और आबकारी विभाग के भ्रष्टाचार को उजागर करने के तुरंत बाद उन्हें ग्रुप से बाहर कर दिया गया। सभी पत्रकारों ने इस मामले पर कलेक्टर अजय श्रीवास्तव से सीधे सवाल पूछा, “क्या आपने खुद ग्रुप से हटाने का आदेश दिया था? अगर हां, तो सभी पत्रकारों को इन ग्रुपों से हटवा सकते हैं। लेकिन याद रखें, देश का चौथा स्तंभ अब भी सच के साथ खड़ा है और रहेगा।” मऊगंज जिले के गठन के बाद से पत्रकारों के साथ बढ़ते दुर्व्यवहार ने मीडिया की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा उन्हें डराने-धमकाने की कोशिशें अब आम होती जा रही हैं। यह घटना बताती है कि मऊगंज जिले में पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से काम करने में बाधाएं बढ़ रही हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस मामले पर ध्यान देगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी दबा दिया जाएगा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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