पहले रूस और यूक्रेन से आते थे रेल के पहिए,अब लालगंज में हो रहा है निर्माण

अप्रैल 2024 में रेल मंत्रालय के अधिग्रहण करने के बाद पहिया निर्माण में आई तेजी

एक साल में 36 से 40 हजार पहिया बनाने का रखा गया लक्ष्य, बढ़कर होगा 50 हजार

रायबरेली।उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के लालगंज में मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री (आरेडिका) नए आयाम स्थापित कर रही है। कोच निर्माण में लक्ष्य से अधिक उत्पादन की उपलब्धि हासिल करने के बाद आरेडिका ने एक कदम और बढ़ा दिया है।अब आरेडिका ने रेल पहिया कारखाने के संचालन की जिम्मेदारी ले ली है।अब पहिया निर्माण में तेजी आ गई है।

अब रूस और यूक्रेन से रेल पहिया मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।अब रेल डिब्बों में आरेडिका के बने पहिए लगाए जा सकेंगे।इसमें लिंक हार्फमैन बुश (एलएचबी) तकनीक से रेल डिब्बे और वैगन कोच बन रहे हैं।पहले रेल डिब्बों में काष्ठ व्हील लग रहे थे,लेकिन एलएचबी डिब्बों में फोर्ज्ड व्हील लग रहे हैं।

इस्पात मंत्रालय ने रेल पहिया कारखाने से 40.5 एकड़ जमीन 5.6 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की दर से किराए पर लेकर पहिया कारखाना का निर्माण कराया था।साल 2013 में पहिया कारखाने की आधारशिला रखी गई। 29 फरवरी 2016 को टेंडर प्रक्रिया हुई,जिसमें जर्मनी की एसएमएस कंपनी को कारखाना बनाने की जिम्मेदारी मिली। 1683 करोड़ की लागत से बनने वाले कारखाने में पहिया निर्माण शुरू होने में लगभग छह साल लग गए। रेल मंत्रालय ने अप्रैल 2024 में इसका अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद पहिया निर्माण में तेजी आई है।अभी तक रेलडिब्बा कारखाना में यूक्रेन और रूस से फोर्ज्ड व्हील मंगाए जाते थे। अब आरेडिका में फोर्ज्ड व्हील बनने से यहां कारखाने समेत अन्य कारखानों को भी पहिया भेजे जाने लगे हैं।फिलहाल हर साल लगभग 40 हजार पहिया बनाने का लक्ष्य है,जिसे बढ़ाकर 50 हजार तक किया जाएगा। इस समय प्रतिमाह लगभग तीन हजार पहिए बनाए जा रहे हैं।इसका नतीजा है कि अप्रैल से लेकर 21 नवंबर तक 23777 रेल पहियों की फोर्जिंग की जा चुकी थी।

एक यात्री डिब्बें में आठ पहिए लगते हैं। यदि आरेडिका में ही प्रतिवर्ष दो हजार रेल डिब्बे बनेंगे तो 16 हजार पहियों की खपत स्थानीय स्तर पर ही होने लगेगी। शेष पहिए अन्य रेल उत्पादन इकाइयों को भेजे जाएंगे। ऐसे में न केवल देश फोर्ज्ड
व्हील उत्पादन में आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि उसकी विदेशी मुद्रा की भी बचत हो रही है।

देश में काष्ठ व्हील चल रहे थे,जिसमें बहुत जल्दी क्रेक होने से पहिया खराब हो जाते थे। फोर्ज्ड व्हील बेहतर तकनीक से बनाए जाते हैं। इसमें स्टील राड से राउंड काटकर फर्निश में गर्म किया जाता है। इसके बाद फोर्जिंग, रोलिंग, हीट ट्रीटमेंट, मशीनिंग करने के बाद टेस्टिंग प्रक्रिया से गुजारा जाता है।

आठ माह में पिछले वित्तीय वर्ष से अधिक रेल पहियों का उत्पादन किया गया है। अभी तक यूक्रेन व रूस से पहिए मंगाने पड़ते थे,लेकिन अब कारखाने में ही पहिए बनने लगे हैं। जैसे जैसे मांग बढ़ती जाएगी, पहिया उत्पादन भी बढ़ाया जाएगा।- अनिल श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी आधुनिक रेलडिब्बा कारखाना

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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