
एटा,1 दिसंबर को आर्य समाज महेंद्रगढ़ के तत्वावधान में घर-घर, गली- गली यज्ञ की श्रृंखला में व महर्षि दयानंद सरस्वती के 200 वे जन्मोत्सव पर,वैदिक विचारधारा को विश्व भर में गुंजायमान करने के संकल्प के साथ आर्य समाज के संरक्षक मास्टर रघुनाथ जी आर्य के ब्रह्मत्व में पूर्व सरपंच विजय सिंह के प्रतिष्ठान ग्रीनफील्ड अकैडमी सिसोठ में यज्ञ का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया गया।
नवीन कुमार सहधर्मिणी अंकिता देवी एवं
नवरत्न आर्य सहधर्मिणी सरिता देवी मुख्य यजमान रहे।
आर्य समाज के प्रधान एवं वैदिक पुरोहित भूपेंद्र सिंह आर्य ने बताया कि यज्ञ करने से वातावरण का परिशोधन, आयु, बल की वृद्धि तथा विचार स्वच्छ हो जाते है।यज्ञ रहित मनुष्य का तेज नष्ट हो जाता है।
यज्ञ में दी हुई आहुतियाँ कल्याणकारक होती है। जो अपना, परिवार, समाज का कल्याण चाहते हैं वो अपने जीवन में नित्य प्रति यज्ञ रूपी परम कर्तव्य को अंगीकार करें।
यज्ञ स्वयं में एक चिकित्सा पद्धति है। यज्ञ वायु मण्डल को शुद्ध करके रोगों और महामारियों को दूर करता है तथा फसल को कीटो से बचाने के साथ पौधों को खाद देने के लिए यज्ञ राख उपलब्ध कराता है।
अग्नि में डाली हुई सामग्री रोगों को उसी प्रकार दूर बहा ले जाती है जिस प्रकार नदी का पानी झागों को बहा ले जाता है।
ऋतु परिवर्तन पर होने वाली बहुत सी बीमारियां सर्दी जुकाम मलेरिया चेचक आदि रोगों को यज्ञ से ठीक किया जा सकता है। इस अवसर पर बाबू रंगराव सिंह आर्य, वीर सिंह मेघवनवास,प्राचार्य विजय पाल आर्य,पूर्व सरपंच कलावती देवी, वेदांत, अर्णव, रविन, कृष्ण, मोनू, बुधराम, रोहित आदि लोग उपस्थित रहे।