
एटा,प्रदेश भर में किसानो की खेती का समय चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने भी आदेश दिए है कि किसानो को खाद की किसी भी तरह की दिक्क़तो का सामना न करने पड़े इसलिए प्रदेश के सभी खाद बिक्री केद्रो पर खाद भेजी गई है।
जनपद एटा के बसुंधरा बिक्री केंद्र पर ज़ब किसी किसान की सुचना पर SDM राजकुमार मौर्य द्वारा स्थलीय जाँच के लिए नायब तहसीलदार सुशील सिंह को भेजा। जाँच में पाया गया कि बिक्री केंद्र तो बंद पाया गया था लेकिन वहां मौजूद किसानो ने आरोप लगाया कि रात्रि में केंद्रीय उपभोक्ता भंडार अध्यक्ष सचिन कांत उपाध्याय द्वारा रात्रि में ही बसुंधरा बिक्री केंद्र को खुलवा कर करीब दो मेंक्स भर कर DAP खाद को लें गए है. ज़ब नायब तहसीलदार द्वारा सचिन उपाध्याय से फोन पर पूछा गया तो उन्होंने भी 70/100 DAP खाद की बोरियो को लें जाने की बात कबूल की गई।
किसानो का यह भी आरोप है कि सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बिक्री केंद्र पर खाद लेने के लिए लाइन लगा कर बैठे रहें लेकिन किसी ने खाद नहीं दिया. ज़ब रात्रि हुई तो सचिन उपाध्याय और मंडी समिति के कर्मचारी आये और एक ट्रेंक्टर और मैक्स भर कर DAP अपने साथ लें गए।
इस पुरे माफियागिरी में कौन शामिल है और कितने पैसे का खेल है यह जाँच का विषय है! क्योंकि किसानो के हितो पर आघात किया जा रहा है।
जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह ने कई बार अपनी मीटिंग में कहा है कि खाद की किसी भी तरह की जिले में कमी नहीं है तो फिर यह गोरखधंधे में खाद डकैतो की तरह क्यों निकाली जा रही है!!
आखिर रात में सचिन कांत उपाध्याय बसुंधरा केंद्र पर क्यों!
यही सबसे बड़ा सवाल अभी भी किसानो के जहन में बना हुआ है. यही सवाल हमारी कलम भी पूछ रही है कि आखिर सचिन उपाध्याय इतनी रात में बसुंधरा केंद्र पर क्यों और क्या कर रहें थे!! ज़ब इस सवाल की तह में पता किया तो कही न कही सचिन उपाध्याय इस पुरे खेल में शामिल नजर आते है?. किसानो के हको पर डकैती डालने में सचिन उपाध्याय का नाम सीधे तौर पर इसलिए भी है क्योंकि 70/100 बोरियो को बसुंधरा केंद्र से लें जाने की बात कबूल की है.
क्या यह पूछा जायेगा या सत्ता के पत्थर से दब जायेगा!
क्या जिले का कोई सक्षम अधिकारी इस पुरे खेल पर कुंडली मारे बैठे लोगों पर FIR कराएगा या जाँच!!क्योंकि जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह के निर्देश तो किसानो के हित के थे.. फिर अहित क्यों और कैसे हो
रहा है।
वीडियो देखने सुनने से पूर्व आप अपने कानो की सुरक्षा हेतु कुछ लगा लें क्योंकि किसानो को ज़ब पीड़ा होती है तो शब्दों को तोलता नहीं वो विद्रोह करता है… हम किसानो के इस विद्रोह का समर्थन करते है।