
बहुत ही चिंतनीय विषय है।
नोएडा में सुपरटेक के 2 टावर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर बारूद लगा कर गिराए गए।
क्योंकि टावर बनाने में नक्शे मे दिक्कत थी, जितनी बना सकते है उस से ज्यादा बना लिया था हालांकि जमीन सुपर टेक वालों की ही थी।
और जहांगीरपुरी में बांगलादेशी रोहिंग्याओं द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा कर के बनाए हुए मकानों और दुकानों से सुप्रीम कोर्ट को कोई दिक्कत नहीं है।
हालांकि न वो इस देश के नागरिक हैं न ही जमीन के मालिक और न ही उन्होंने कोई नक्शा पास कराया है।
सुपरटेक का मालिक अरबपति होते हुए भी अपनी करोड़ों की संपत्ति नहीं बचा पाया और ये बांग्लादेश रोहिंग्या ने कंगाल होते हुए भी रातों रात सुप्रीम कोर्ट को प्रभावित कर लिया।
जहां-जहां जिहादियों ने अवैध बस्तियां बना ली है वहां पर बुलडोजर चलते ही उनके वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं और बाकायदा रोक लगवा देते हैं।
बड़े-बड़े वकीलों को फीस देने का पैसा कहां से आता है यह किसी को पता नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट भी उनके लिए अलग से तर्क देता है कि पहले इनको बसाने का व्यवस्था करो, फिर जमीन खाली करो।
यही हाल हल्द्वानी में घुसपैठियों की बस्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है जो रेलवे की जमीन पर बसे हुए हैं।
सोचिए कितनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय शक्तियां होंगी इनके पीछे,
हमारा सुप्रीम कोर्ट भी इन जिहादियों के लिए मजबूर है हमेशा इनका साथ देता है।
यह बहुत ही चिंतनीय विषय है।